जिला महिला चिकित्सालय में नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया गया। जिसमें चिकित्सकों ने बच्चों की अनेक बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। साथ ही नवजात बच्चों का वजन और उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। अस्पताल में करीब 40 बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ पाए गए। वहीं, चिकित्सकों ने कहा कि जन्म की एक मिनट और एक घंटे के भीतर मां का दूध बच्चे के लिए बेशकीमती है।
स्वामी कल्याण देव जिला महिला चिकित्सालय में सोमवार को नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया गया। जिसमें सीएमएम डॉ. अमिता गर्ग के निर्देशन में नवजात बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सकों ने शून्य से एक वर्ष के बच्चों का वजन, उनके स्वास्थ्य के साथ खान-पान आदि के बारे में परीक्षण किया।
अस्पताल में करीब 50 बच्चों का परीक्षण हुआ। जिनमें 40 पूरी तरह से स्वास्थ्य मिले, बाकी 10 बच्चों को मामूली तकलीफ पाई। इसके बाद अस्पताल में कार्यशाला की गई। जिसमें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय ने कहा कि बच्चे के जन्म का एक मिनट सबसे खास होता है।
यही क्षण बच्चे के सांस लेने आदि के बारे में जानकारी देता है। साथ ही बच्चे को एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना अति आवश्यक है। इससे बच्चे में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जन्म के बाद एक घंटे तक बच्चे को मां से लिपटाकर रखना चाहिए। इस प्रक्रिया को कंगारु केयर कहते हैं, ताकि बच्चे के शरीर में गर्माहट बनी रही।
सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने कहा कि बच्चों की देखभाल के लिए मां को सतर्क रहना चाहिए। अब सर्दी के मौसम में अनेक बीमारियों का खतरा बढ़ता है, इससे बचने के लिए विशेष उपाय रखें। नवजात बच्चों को छह माह तक मां के दूध के अलावा अन्य वस्तुओं का नहीं देना चाहिए।
सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने कहा कि जन्म से लेकर बच्चे के पैरों पर खड़े होने तक विशेष देखभाल जरूरी है। इसमें बच्चे को ही नहीं, मां को भी अपने खान-पान का ख्याल रखना चाहिए। बच्चों का टीकाकरण जरूर कराएं। विभागीय कार्यक्रम सूचना अधिकारी गीतांजलि वर्मा, डॉ वीके ओझा आदि मौजूद रहे।