मुजफ्फरनगर। शहर के गली-मोहल्लों में घूमते खूंखार कुत्तों को पकड़ने के लिए पालिका प्रशासन ने जब नागरिकों की गुहार नहीं सुनी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत पर गंभीरता दिखाई। सीएम के आदेश पर अब पालिका कुत्ते पकड़ने के लिए तैयार हो गई है। पालिका प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पिंजरों में कैद करने के लिए टेंडर निकाले हैं। सीएम के हस्तक्षेप के बाद डीएम की अनुमति से कुत्तों को शहर से दूर जंगलों में छोड़ने की तैयारी कर ली गई है।
शहर के मोहल्लों, कालोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर आए दिन कुत्तों के हमलों से महिला, बुजुर्ग और बच्चों के घायल होने की शिकायतें मिलती हैं। प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई मर्तबा नगर पालिका और अफसरों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए लिखित में गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आरटीआई कार्यकर्ता खालिद समेत पांच लोगों ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र लिखे। हैरत की बात है कि जिस समस्या का जिला स्तर पर संज्ञान नहीं लिया गया, उसे सीएम कार्यालय पर गंभीर लापरवाही माना गया।
तत्काल सीएम के आदेश पर डीएम को पत्रावली भेजी गई। डीएम के निर्देश पर पालिका प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने की तैयारी कर ली है। पालिका के क्षेत्र पर गौर करें तो बाहरी बस्तियों में ऐसे कई मोहल्ले हैं, जहां फेंके गए मांस को खाकर कुत्ते खूंखार हो चुके हैं। सरवट, खालापार, किदवईनगर, मिमलाना रोड, मल्हूपुरा आदि में दिनभर सड़कों पर आवारा कुत्ते मंडराते हैं। सबसे ज्यादा खतरा दुपहिया वाहन चालकों को है। कुत्ते एकाएक बाइक, स्कूटी के पीछे भाग लेते हैं, जिस वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं।
रैदासपुरी, गंगरामपुरा, लद्दावाला, रामपुरी, सरवट रोड, पचेंडा रोड पर ऐसी कई बस्तियां हैं, जहां आने-जाने में कुत्तों का खतरा रहता है। केशवपुरी निवासी संदीप सिंघल कहते हैं कि गली में कुत्तों का हमला ऐसा हो गया है कि रिश्तेदार आने से घबराते हैं। रात में स्टेशन और बस स्टैंड से आते समय कुत्तों से बचाव की दिक्कतें रहती हैं।
डीएम के निर्देश पर आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए टेंडर डालकर एजेंसी नियुक्त की जाएगी। शहर को आवारा कुत्तों से मुक्त कर दूर ले जाकर जंगलों में छोड़ा जाएगा। इस संबंध में सीएम कार्यालय को भी नागरिकों की शिकायतें मिली थीं, जिस पर कार्रवाई की जा रही है।
-अजीत सिंह, ईओ, नगर पालिका