भारत में कबड्डी का क्रेज बढ़ रहा है। लगातार तीन बार वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत के खास मायने हैं। कबड्डी में युवा खिलाड़ियों ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। विश्व चैंपियन बनने के बाद भारत का अगला लक्ष्य जकार्ता एशियाड में अजेय रहना है। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान संजीव कुमार ने अहमदाबाद में भारत की जीत पर यह बात कही।
कबड्डी विश्व कप के फाइनल में ईरान के खिलाफ भारत की शानदार जीत पर अर्जुन अवार्डी संजीव कुमार गदगद हैं। 2004 में भारत ने उन्हीं की कप्तानी में पहला कबड्डी वर्ल्ड कप खेला था, जिसमें न केवल उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला, बल्कि भारत ने ईरान को शिकस्त देकर पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव भी पाया था।
जिले के गांव मुंडभर निवासी संजीव कुमार ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि ईरान, साउथ कोरिया, जापान, पाकिस्तान और थाईलैंड कबड्डी में अच्छी टीमें हैं। फाइनल में चमके अजय ठाकुर, संदीप निर्वाल, राहुल चौधरी, नितिन तोमर, मंजीत छिल्लर ने उम्दा प्रदर्शन किया।
क्रिकेट, लॉन टेनिस, शूटिंग, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती के साथ अब गांव के परंपरागत खेल कबड्डी का क्रेज भी युवाओं में बढ़ रहा है। टी-20 की तर्ज पर प्रो-कबड्डी गेम में प्रायोजकों की रुचि से भी कबड्डी की अहमियत बढ़ गई है। कबड्डी में पैसा, ग्लैमर और कैरियर के सुनहरे अवसर हैं।
वर्ष 1998 में बुसान और 2002 में साउथ कोरिया में हुए एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिला चुके संजीव ने कहा कि स्कूली स्तर पर खेलों को अनिवार्य किया जाए। गांव में मिनी स्टेडियम बनेंगे तो प्रतिभाओं को चमकने का मौका मिलेगा। विश्व चैंपियन बनने के बाद वर्ष 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में होने वाले एशियाड में कबड्डी का गोल्ड जीतना भारतीय टीम का अगला लक्ष्य है।