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करोड़ों की सरकारी जमीन कब्जाने वालों को एसडीएम का नोटिस

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सरकारी जमीन कब्जाने वालों को नोटिस जारी
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मुजफ्फरनगर। सरकारी जमीनों के रिकार्ड में हेराफेरी कर किए गए अवैध कब्जों पर कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर ने नोटिस जारी किया है। शहर के बीचोंबीच भोपा रोड की 53 बीघा जमीन को लेकर यह कार्रवाई की गई है। नोटिस दस लोगों को जारी किया गया है, जिनसे 30 जून तक जवाब देने के लिए कहा गया है। समय पर जवाब नहीं देने सरकार के पक्ष में एक पक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एसडीएम सदर के न्यायालय से जारी नोटिस में कहा गया है कि तहसीलदार सदर की 31 मार्च 2020 की आई जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है। नोटिस में युसुफपुर बाहर हदूद के उन खसरा नंबरों को भी विस्तार से दिया गया है, जिनमें कूट रचना कर जमीन को हड़पा गया है। दस लोगों को जारी नोटिस में कहा गया है कि 53 बीघा जमीन राज्य सरकार की मूल्यवान संपत्ति थी। इस संपत्ति पर राजस्व अभिलेखों में ओवर राइटिंग द्वारा हेराफेरी कर अनाधिकृत कब्जा किया गया है। अभिलेखों में कूट रचना व कपट का सहारा लेकर मौरूसी काश्तकार के साथ-साथ खेवट चौसाला में भी जमींदार के रूप में अपने नाम की फर्जी एंट्री करा ली और जमींदार के रूप में ट्रांसफरेबल अधिकार अर्जित कर लिए गए। राज्य सरकार की भूमि का हड़पा गया है और अनुचित लाभ अर्जित किए गए हैं। जिनको निरस्त किया जाना है। स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष 30 जून तक न्यायालय में रखें, नहीं तो एक पक्षीय आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
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इन लोगों को जारी ह़ुआ नोटिस
मुजफ्फरनगर। डिप्टी कलक्टर ने न्यायालय से जिन लोगों को नोटिस जारी किया है उनमें मुख्य रूप से आलोक कुमार स्वरूप-अनिल कुमार स्वरूप भोपा रोड, ओमप्रकाश, अतुल कुमार जगाधरी, मिलिंद अग्रवाल दिल्ली, क्षिरजा अग्रवाल नोएडा, सिद्धार्थ सिंघल पुणे, पीयूष जिंदल नई दिल्ली, प्रबंधक मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज, प्रबंधक कमला फार्म-भावना फार्म, प्रबंधक लिट्रा जी स्कूल शामिल हैं।
30 जून तक मांगा है जवाब
मुजफ्फरनगर। उप जिलाधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि सरकार की कुछ जमीनों में हेराफेरी हुई है, जिसकी तहसील स्तर पर जांच हुई है। जांच के आधार पर नोटिस जारी किया गया है। 30 जून तक जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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नोटिस का दिया जाएगा जवाब
इस संबंध में अनिल स्वरूप का कहना है कि एसडीएम की ओर से जारी नोटिस प्राप्त हुआ है। करीब ढाई साल पहले भी तहसीलदार का एक नोटिस इसी जमीन को लेकर मिला था। उसका जवाब दे दिया था, अभी तक तहसीलदार यह तय नहीं कर पाए है कि यह शत्रु संपत्ति है या नहीं। अब फिर से नोटिस मिला है, इसका तीस जून एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे।
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