मुजफ्फरनगर। 23 साल पहले अपना उद्योग शुरू करने को लिए गए लोन की अदायगी नहीं करने वाले 25 बकायेदारों को खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने नोटिस जारी किया है। उन्हें एक मुश्त समाधान योजना के तहत बकाया जमा करने के लिए कहा गया है। बोर्ड का लगभग 78 लाख रुपया बकाया चल रहा है।
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने 1995 से 2000 के बीच सीबीसी योजना के अंतर्गत लोगों को उद्योग शुरू करने के लिए सीधे ऋण का वितरण किया था। जिले के करीब 45 लोगों को विभिन्न उद्योगों की स्थापना के लिए लोन दिया गया था। इनमें से 25 लोग अभी ऐसे हैं जिन्होंने 23 साल बीतने के बावजूद लोन की अदायगी नहीं की। बोर्ड का इन लोगों पर करीब 78 लाख 67 हजार 353 रुपये का मूलधन बकाया है जबकि ब्याज एवं दंड ब्याज की धनराशि अलग है। बोर्ड ने धनराशि जमा नहीं कर रहे लोगों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वे एक मुश्त समाधान योजना के तहत अपनी लोन की अदायगी कर सकते हैं। खादी ग्रामोद्योग अधिकारी एसएल अग्रवाल ने बताया कि संबंधित व्यक्ति केवल मूलधन जमा कर इस योजना का लाभ ले सकते हैं। उन्हें ब्याज एवं दंड ब्याज की धनराशि जमा करने की आवश्यकता नहीं है। 45 में से 20 लोगों ने धनराशि जमा कर दी है, जबकि 25 को नोटिस जारी किए गए हैं।
अब बैंक से दिया जाता है लोन
मुजफ्फरनगर। सन 2000 के बाद खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने सीधे लोन देने की व्यवस्था बंद कर दी। अब बैंकों के माध्यम से ही ऋण दिया जाता है। साथ ही सब्सिडी भी बैंक खाते में ही दी जाती है।
इन कार्यों के लिए लिया था लोन
25 बकायेदारों में ज्यादातर 1996-97 में लोन लेने वाले शामिल हैं। इन लोगों ने झाड़ू बनाने, डीजल इंजन मरम्मत, बांस बैंत, लौहकला, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रामीण कुम्हारी कला, बिजली यंत्र मरम्मत, फुटवियर, नाई, काष्ठ कला, अखाद्य तेल, चूना, मौन पालन, गुड़ कोल्हू, हाथ कागज, एल्यूमिनियम आदि कार्यों के लिए लोन लिया था।