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सरकारी अस्पताल में नहीं पर्याप्त स्टाफ, इलाज रामभरोसे

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मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में प्राइवेट डॉक्टरों के यहां महंगा इलाज करा चुके लोगों को फिर से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ओमिक्रॉन के बढ़ते प्रभाव के बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बदइंतजामी हावी है।
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शासन ने दूसरी लहर की परेशानियों के बावजूद यहां स्टाफ नियुक्त करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। डॉक्टरों के आधे पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकृत के सापेक्ष खाली पदों के लिए पत्र भेजे, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिले के 43 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकतर पर डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। पीएचसी पर बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को प्राइवेट डॉक्टरों के यहां जाना पड़ता है।
केस-एक
पुरकाजी में फार्मासिस्ट नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुरकाजी में फार्मासिस्ट का पद खाली पड़ा है। वार्ड ब्वाय सिर्फ एक है और एक स्टाफ नर्स का पद रिक्त है। फार्मासिस्ट नहीं होने के कारण दूसरे कर्मचारी दवा बांटते हैं।
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केस-दो
फलौदा में सिर्फ एक डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फलौदा में छह डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां पर एक डॉक्टर ही तैनात है। स्टाफ नर्स के छह पद हैं, लेकिन एक भी नहीं है। तीन फार्मासिस्टों के सापेक्ष सिर्फ एक ही नियुक्त है। यही हाल छह वार्ड ब्वाय में सिर्फ एक ही है।
केस-तीन
अवकाश पर डॉक्टर तो ओपीडी में फार्मासिस्ट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में तैनात डॉ. परितोष मुदगल एक माह के अवकाश है। ऐसे में उनकी गैर हाजिरी में फार्मासिस्ट ही ओपीडी संभाल रही हैं। केंद्र प्रभारी का दावा है कि यहां दवाइयों की कमी नहीं है।
कोट...
- स्टाफ की कमी के विषय में शासन को समय-समय पर पत्र लिखे गए हैं। स्टाफ मिलते ही प्राथमिकता के हिसाब से नियुक्त कर दिया जाएगा। - डॉ. महावीर सिंह फौजदार, सीएमओ
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