मुजफ्फरनगर। सड़कों पर उमड़ी वंदेमातरम के नारे लगाती बच्चों की टोलियां इस बार दिखाई नहीं देगी। स्कूलों में ध्वजारोहण के बाद गुलदाने का प्रसाद भी बच्चों को नहीं मिल पाएगा। कोरोना के चलते बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया गया है। स्कूल-कॉलेजों के लिए गुलदाना और मोतीचूर के लड्डू बनाने वालों को कोरोना का यह बड़ा झटका लगा है।
कोरोना महामारी ने इस बार बच्चों की 15 अगस्त की खुशियां भी छीन ली हैं। 15 अगस्त के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने को लेकर बच्चों में एक अलग उत्साह रहता है। सुबह के समय प्रभात फेरी के दौरान वंदेमातरम और भारत माता की जय के नारे स्कूली बच्चों में देशभक्ति का जोश भरते रहे हैं। इस बार बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है तो उनको मायूसी हाथ लगी है। महामारी से बचाव के लिए बच्चे स्कूल नहीं आएंगे, इस कारण ध्वजारोहण के बाद बंटने वाला गुलदाना एवं मोतीचूर के लड्डू के प्रसाद का स्वाद भी बच्चे नहीं ले पाएंगे। सबसे बड़ा नुकसान जनपद के उन हलवाइयों को हुआ है, जिन्हें कई दिन पहले आर्डर मिल जाते थे। कोरोना के चलते एक तरफ तो व्यवसाय पहले से ही आधा रह गया और ऊपर से 15 अगस्त को मिलने वाला काम भी इस बार नहीं मिल पा रहा है।
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15 अगस्त को सभी स्कूलों में प्रसाद बंटता था। बच्चों की संख्या के हिसाब से प्रसाद बनवाया जाता था। जिन स्कूलों 20 किलो प्रसाद जाता था, इस बार वहां केवल अध्यापकों के लिए एक या दो किलो जा रहा है। हलवाइयों को इस बार बड़ा नुकसान है। - अशोक कुमार, हलवाई
हलवाई को पहले से ही उम्मीद होती है कि 15 अगस्त को उसको कुछ काम मिल जाएगा। लड्डू बनाने का काम तो कई दिन पहले शुरू हो जाता था। इस बार कोई ऑर्डर नहीं मिला, स्कूलों में भी केवल ध्वजारोहण होगा, बच्चे नहीं बुलाए गए है। कोरोना हर चीज पर प्रभाव पड़ा है। - रोशन कुमार, हलवाई