चरथावल/मुजफ्फरनगर। अदालत ने धर्म परिवर्तन कराने वाले दूसरे वर्ग के दो आरोपियों की जमानत रद्द कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-एक, विष्णु चंद वैश्य ने सुनवाई की।पांच अप्रैल को चरथावल के गांव कसौली में बेसहारा पंजाबी समाज की महिला प्रार्थना और उसके भांजे रमन की आर्थिक मदद का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का मामला प्रकाश में आया था।
गांव निवासी सुरेश पाल सहित काफी ग्रामीणों ने इस करतूत से हिंदूओं की भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया। आक्रोशित ग्रामीणों ने दूसरे वर्ग के तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी कर धर्म परिवर्तन कराने की प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने दबाव पड़ने पर मुख्य आरोपी कसौली निवासी गुफरान और सहअभियुक्त सूफियान सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान किया। बचाव पक्ष की ओर से दो आरोपियों की जमानत अर्जी दाखिल की गई। पीठासीन अधिकारी ने गुफरान और सूफियान की जमानत नामंजूर कर दी।
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अदालत की टिप्पणी:
प्रथमदृष्टया मामला सामुदायिक संवेदनशीलता एवं धर्म परिवर्तन जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित है। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने एवं गवाहों पर प्रभाव डालने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
चर्चाओं में रहा प्रकरण
मौसी-भांजे का धर्म परिवर्तन प्रकरण में बघरा आश्रम के स्वामी यशवीर ने वांछित आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पंचायत कर पुलिस को अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कृत्य में दूसरे वर्ग के लोग शामिल है। जो साजिश के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आर्थिक मदद के नाम पर धर्म परिवर्तन कराते हैं। इनका नेटवर्क फैला हुआ है। इस मुद्दे की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। दरअसल, गैंग की गतिविधियों से हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचीं है।
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इन धाराओं में प्राथमिकी:
पुलिस ने वादी की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 61(2),196(ख), 299, 318(4) एवं उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रति0 अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) में प्राथमिकी दर्ज की कराई गई थी।