किसानों और बागबानों के लिए बुरी खबर है, अभी आंधी-बारिश से राहत नहीं मिलने वाली है। लगभग 72 घंटे तक मौसम में खूब उतार-चढ़ाव बना रहेगा। बुधवार को रुक रुककर हुई बारिश किसानों के साथ आमजन प्रभावित हो गया। शहर में कई स्थानों पर जलभराव की समस्या बन गई, तो खेत-खलियानों में खड़ी फसल हवा, पानी से गिर गई। सबसे अधिक नुकसान गेहूं, सरसों के साथ आम और सब्जियों को हुआ है। गेहूं में पानी भरने से जड़ गलनी शुरु हो गई, जबकि पेड़ों से आम का बौर टूटकर गिर गया।
बंगाल की खाड़ी से उठी मौसमी हलचल के बाद समूचा प्रदेश इसकी चपेट में आ गया। सोमवार से मौसम में हुए बदलाव के कारण आंधी-बारिश का सिलसिला जारी है। कभी धूप तो कभी छांव से आम जन पर भी असर पड़ा है। तेज हवाएं चलने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। पश्चिम से पूरब की ओर हवाओं की रफ्तार अधिक है, जबकि बरसात होने पर फसल पानी में डूब गई है।
बुधवार दिन निकलते ही छाये काले बादल क्षणभर में बरस पड़े। करीब आधा घंटा तक निर्बाध वर्षा हुई। दोपहर को धूप खिली रही, मगर शाम होते-होते फिर से बारिश शुरु हो गई। जिले में करीब 10.4 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इस साल की सबसे अधिक बारिश बताई गई है। बारिश का अधिक खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों पर फसल पर पड़ा है। जड़ों में पानी भरने और तेज हवाओं के कारण फसलों की खेत में चादर बिछ गई।
बेमौसम बारिश से पकना शुरू हुआ आम का बौर टूट कर गिर गया। मौसम के बिगड़े रुप को देखकर बाग ठेकेदारों, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। जमीन से सटाकर उगने वाली फसलें गोली, बंद गोभी, बैंगन, भिंडी आदि के साथ खरबूजा, तरबूज की फसल भी प्रभावित हो गई है।
उधर, मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की कटाई और आम के पकने के दौरान मौसम हर साल बिगड़ता है। हालांकि इस बार पहले ही आंधी-बारिश ने दस्तक दी है। इसका क्रम करीब एक सप्ताह तक बना रहता है। अगले 72 किसानों, बाग ठेकेदारों के लिए मुसीबत से कम नहीं है।
यातायात थमा, जनजीवन प्रभावित
मुजफ्फरनगर। बुधवार सुबह और शाम को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से यातायात की रफ्तार थम गई। आंधी से वाहन जहां-तहां रुक गए। बारिश होने से सड़कों पर जलभराव हो गया। जिससे आवागमन प्रभावित हो गया। बेमौसम बारिश के चलते शहर में समय से पहले बाजार बंद हो गए।