गंगनहर किनारे केमिकल युक्त राख में एक व्यक्ति की मौत और दो लोगों के झुलसने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। भोपा क्षेत्र में गंगनहर किनारे पड़ी केमिकलयुक्त राख का मामला फिर गरमाने लगा है। एनजीटी मामले की अब तक हुई जांच से संतुष्ट नहीं है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है।
नया गांव निवासी मोहम्मद नबी (32) नौ जुलाई 2022 को गंगनहर के किनारे खड़े पेड़ों से पत्तियां लेने के लिए गया था। इसी दौरान वहां पड़ी केमिकल युक्त राख की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। उपचार के दौरान नबी की मौत हो गई थी। इसके बाद 21 अगस्त 2022 को भिक्की निवासी चाचा-भतीजे मोमीन और सैफ इसी राख की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए। आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए सैफ के परिवार के मोहर्रम अली ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। प्रशासन ने केमिकलयुक्त राख की रिपोर्ट भेजी, लेकिन एनजीटी इस पर संतुष्ट नहीं है। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग से रिपोर्ट तलब की है।
पांच साल पहले दबाए थे ड्रम
नंगला बुजुर्ग में नहर किनारे राख डालने वालों की तलाश शुरू हुई तो ठेकेदार इरफान उर्फ भूरा और उसके बेटे मोहम्मद आसिफ का नाम सामने आया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में सामने आया कि 2018 में केमिकल के ड्रम इस राख में दबा दिए गए थे, जिससे राख जानलेवा साबित हो रही है। पुलिस ने जांच की भूरा निर्दोष मिला, जबकि केमिकल के ड्रम राख में दबाने वाले अंजुम के खिलाफ धारा 304 ए में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। भूरा और अंजुम पर 91-91 लाख और क्षेत्र की फैक्टरियों पर एक करोड़ 53 लाख का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।