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एनजीटी ने ठोका मंसूरपुर डिस्टलरी पर 32.40 लाख जुर्माना

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एनजीटी ने मंसूरपुर डिस्टलरी पर 32.40 लाख जुर्माना लगाया
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मुजफ्फरनगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंसूरपुर डिस्टलरी पर प्रदूषित पानी नाले में छोड़े जाने के आरोप में 32.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मंसूरपुर के एक युवक के वाद दायर करने पर एनजीटी की टीम ने डिस्टलरी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान टीम को डिस्टलरी में भारी अनियमितताएं मिलीं थीं। इस मामले में अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी। एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए काफी सख्ती की है।
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मंसूरपुर निवासी विनीत कुमार ने कुछ माह पूर्व एनजीटी में मंसूरपुर स्थित सरशादी लाल डिस्टलरी एंड केमिकल वर्क्स के खिलाफ वाद दायर कर प्रदूषित पानी नाले में छोड़े जाने का आरोप लगाया था। एनजीटी ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया। 26 नवंबर को एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने डिस्टलरी का अचानक निरीक्षण किया था। टीम के निरीक्षण के दौरान काफी खामियां मिलीं थी। इसमें प्रदूषण मानकों का स्पष्ट उल्लंघन होता पाया गया था, जिसके तहत इंडस्ट्री का प्रदूषित पानी एक फ्लैक्सीबल पाइप के सहारे मंसूरपुर नाले में बहाया जा रहा था। यह नाला आगे जाकर काली नदी में मिलती है। इस वजह से नदी भी प्रदूषित हो रही थी। काली नदी के प्रदूषित होने पर टीम ने काफी नाराजगी जताई थी। टीम ने अधिकारियों को भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए थे। डिस्टलरी का यह कृत्य एनजीटी व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जबरदस्त अनियमितता करार दिया था। इसके तहत एनजीटी ने मंसूरपुर डिस्टलरी पर पर्यावरण क्षति के अनुसार 30 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 108 दिन का 32.40 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब एक फरवरी को होगी।
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