फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कौशल के दम पर नीरज ने पाया मुकाम

Mon, 19 Mar 2018 12:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
विज्ञापन
possitive news - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। कौशल के दम पर एक डिप्लोमा इंजीनियर ने देश की टू-व्हीलर ऑटो मोबाइल मार्केट में धाक जमाई है। नई तकनीक से तैयार की गई ऑयल पंप बॉडी का 50 प्रतिशत से ज्यादा बाजार पर कब्जा हो गया है। कभी 1170 रुपये प्रतिमाह की नौकरी कर चुके खतौली के इंजीनियर नीरज पांचाल की कंपनी का वार्षिक टर्न ओवर करोड़ों में है।
विज्ञापन


मेहनत और लगन के दम पर कामयाबी की यह दास्तां युवा वर्ग के लिए मिसाल है। खतौली के बुढ़ाना रोड निवासी शुक्लचंद के बेटे नीरज ने शाहजहांपुर के राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। नौकरी की तलाश में भटकने के बाद 1170 रुपये माहवार पगार मिली।

संघर्ष के वक्त में भी उम्मीदें नहीं छोड़ी। फरीदाबाद, रेवाड़ी, नोएडा की फैक्ट्रियों में जॉब किया, मगर मासिक वेतन नौ हजार ही पहुंच पाया। नीरज को एल्युमीनियम डाई कास्टिंग में कुछ नया करने की धुन थी। वह ताईवान से आयात कर ऑटोमोबाइल के उत्पाद बेचने लगा। उसके तकनीकी हुनर को भांप गुड़गांव की याहामा कंपनी ने पांचाल को 13 लाख के पैकेज पर रख लिया। जापान में उसे विशेष ट्रेनिंग दिलाई गई।
विज्ञापन


सफलता की राह पाने के बाद भी कुछ खास करने का जुनून मन में चलता रहा। उसने नई तकनीक की कॉस्टिंग डाई से स्कूटर, बाइक, स्कूटी में प्रयोग होने वाली ऑयल पंप की बॉडी का निर्माण किया। ऑटो मोबाइल कंपनियों को नीरज की ऑयल पंप बॉडी
पसंद आ  गई।

किफायती दाम और तकनीक में श्रेष्ठ उनका उत्पाद देश के टू व्हीलरों में प्रयोग होने लगा। फिलहाल 50 प्रतिशत से ज्यादा बाजार में उनका प्रोडक्ट बिक रहा है। यामाहा, होंडा, हीरो, सुजूकी, रॉयल इनफिल्ड, बजाज आदि कंपनियों के दो पहिया वाहनों में उनकी बनाई ऑयल पंप बॉडी लग रही है। इंजीनियर नीरज पांचाल का कहना है कि कौशल और तकनीकी का क्षेत्र व्यापक है।
आईटीआई और डिप्लोमा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य को पाने तक जुटे रहना चाहिए।

घाटे में बंद हो गई थी बच्चों की पढ़ाई

युवा उद्यमी नीरज पांचाल को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा अपने दादा हरफूल सिंह पांचाल से मिली। उन्होंने जवाहर लाल स्मृति इंटर कॉलेज रवापुरी सठेड़ी से बारहवीं उत्तीर्ण कर पालीटेक्निक में प्रवेश लिया था। पत्नी आरती पांचाल बताती हैं कि जीवन में आए उतार-चढ़ाव की वजह से एक साल बच्चों वर्णिका और वंश की पढ़ाई बंद रही, मगर नीरज ने हौसला नहीं खोया।

रुद्रपुर सिडकुल में लगाई फैक्ट्री

ऑयल पंप बॉडी बनाने की नीरज ने वर्ष 2012 में साझेदारी में फैक्ट्री लगाई थी। कंपनी तीन साल में तीन करोड़ के घाटे में चली गई। बैंक लोन और कर्ज के दबाव ने मुश्किल हालात कर दिए। हिम्मत जुटा कर वर्ष 2015 में रुद्रपुर के सिडकुल में पांचाल ने एचएसपी टेक्नॉलोजी कंपनी खड़ी की। समय बदला और आज टर्नओवर करोड़ों में है। फैक्ट्री में 94 श्रमिक और तकनीकी विशेषज्ञ कार्यरत हैं।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें