संवाद न्यूज एजेंसी
पुरकाजी। कथा व्यास चंद्र किरण महाराज ने लंका दहन की कथा का प्रसंग बड़े ही सुंदर ढंग से सुनाया। उन्होंने कहा कि लंका दहन ने रावण को कड़ा सबक सिखाया
कस्बे में समाज सुधार समिति के सौजन्य से चल रही श्रीराम कथा में मंगलवार रात उन्होंने बताया कि समुन्द्र में रहने वाली सुरसा नाम की राक्षसी अपनी शक्ति का परीक्षण करने के लिए हनुमान को रोकती है। हनुमान अपनी शक्ति का उपयोग करके अपने शरीर के आकार को बढ़ाते हैं। सुरसा भी अपने शरीर के आकार को बढ़ाती है।
हनुमान चतुराई दिखाते हुए सुरसा को चकमा देकर अपने शरीर को छोटा करके उसके मुंह में प्रवेश करते हैं और तुरंत बाहर निकल आते हैं। सुरसा हनुमान की शक्ति और चतुराई से संतुष्ट हो जाती है और उन्हें रास्ता दे देती है। लंका पहुंचने पर हनुमान सीता की खोज में लग जाते हैं।
हनुमान सीता की खोज में अशोक वाटिका में पहुंचकर भगवान श्रीराम की दी हुई निशानी अंगूठी सीता को दिखाकर अपनी पहचान कराते हैं। यहां हनुमान को पकड़कर रावण के दरबार में ले जाया जाता है। जहां हनुमान की पूंछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद लंका दहन हुआ।