पहलगाम में सैलानियों पर आतंकी हमले से लोगों के बीच गम और गुस्सा है। आतंक को झेल चुके गांव दूधली के मास्टर रामपाल सिंह दुखी हैं। दरअसल जून 2004 में पहलगाम स्थित उधमपुर-कटरा रेल मार्ग से इंजीनियर बेटे सुधीर और संदीप को अगवा कर आतंकवादियों ने निर्मम हत्या कर दी थी।
पहलगाम में बेकसूर पर्यटकों की वीभत्स हत्या से पूरे देश में पीड़ा है। कश्मीर में हुई घटना में दूधली का दर्द छिपा है। वर्ष 2004 में गांव के रामपाल सिंह का इंजीनियर बेटा सुधीर (25) वहां इरकॉन कंपनी में कटरा रेलवे प्रोजेक्ट में लाइन का निर्माण करा रहा था। उन दिनों उनका छोटा भाई कंप्यूटर इंजीनियर संदीप (18) भी वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गया हुआ था।दोनों भाई साइट पर कार चालक एवं ठेकेदार के साथ जाने के लिए निकले थे। रास्ते में आतंकियों ने दोनों का अपहरण कर लिया था, जबकि ठेकेदार अशरफ और कार चालक को छोड़ दिया था।
दो दिन बाद 25 जून 2004 को काजीगुड़-बारामूला में दोनों भाइयों की सिर कटी लाशें मिली थीं। शव गांव में आने के बाद श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली से नेताओं का जमावड़ा दूधली में लगा था। बड़ी घोषणाएं, वादे किए गए। मगर अमल नहीं हो पाया। घर के दोनों चिरागों को गंवाने की पीड़ा वयोवृद्ध पिता रामपाल सिंह की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।