सेंट्रल ट्रेड यूनियनों की 12 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल जिले में सफल रही। श्रमिकों के साथ यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन, मजदूर सभा, मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन के लोग आंदोलन में शमिल रहे। जिले के सभी सार्वजनिक बैंकों में कामकाज ठप रहा। बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे। बैंक शाखाओं में लेन देन नहीं होने से ग्राहकों के चैकों की क्लीरियेंस नहीं हो सकी। पीएनबी नईमंडी के सामने प्रदर्शन भी हुआ।
तेजराज गुप्ता, बीके सूर्यवंशी, राजीव जैन, रविंद्र सिंह, एके भटनागर, रजनीश आदि ने केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरुद्ध नारेबाजी की। सत्यनारायण गोयल, श्रीश वर्मा, अनिल गोयल, दिनेश गुप्ता, नवीन, सतीश कुमार, रविंद्र शर्मा, मुकेश भार्गव, राजेश, गौरव दीक्षित आदि रहे। यूपी वाणिज्य कर, मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने लंबित मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार किया।
समस्त कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर रहे। सुधीर कुमार, अंशुल मैनी, नरेंद्र सिंह, संजय कटारिया, राजेंद्र प्रसाद गर्ग, जगमाल सिंह, जुबेर खां, रोहताश सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि रहे। भारतीय मजदूर सभा ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन दिया। न्यूनतम वेतन 18000 करने की मांग की गई। मंत्री सम्राट सिंह ने कहा कि मजदूर विरोधी सभी संसोधनों को वापस लिया जाए। जिले के श्रमिक संगठनों से जुडे़ लोगों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए श्रम विभाग में भ्रष्टाचार का मामला उठाया। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारी दलालों के चंगुल में फंस चुके हैं। विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम डीएम को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया कि सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश को तत्काल रोका जाए। राष्ट्रहित में आर्थिक नीतियां बनाई जायें। श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू किया जाए, स्थायी प्रकृति के काम में ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाई जाए। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 18 हजार प्रतिमाह दिया जाए। श्यामवीर राठी, रामचंद्र, राजबल त्यागी, सुभाष उपाध्याय, सहदेव सिंह, छोटे खां, अमरीश, आरपी शर्मा, राजीव जैन, शशी भूषण आदि मौजूद रहे।