गाय अभयारण्य का लोकार्पण करते एसपी सिंह बघेल, साथ में अन्य बीजेपी नेता।
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि गाय को हम माता मानते हैं। मगर दूसरी पार्टियां उसे मौसी भी नहीं मानती। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि कृत्रिम गर्भधारण कराकर बछिया पैदा कराएं, जिससे क्षेत्र में दूध की नदियां बहेंगी। सपा मुखिया को लेकर कहा कि अखिलेश यादव को गोशाला से बदबू आती होगी, हमें तो खुशबू आती है।
कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र के गांव कम्हेड़ा में स्थापित गाय अभयारण्य का मंगलवार को लोकार्पण करते हुए एसपी सिंह बघेल ने कहा कि एक जमाना था जब बछड़ा पैदा होने पर परिवार में खुशी होती थी और गांव में मिठाई बांटी जाती थी। बैल से कोल्हू चलते थे। खेतों की जुताई की जाती थी। मगर अब जमाना बदल गया है। बछड़ा पैदा होने से परिवारों में अफसोस किया जाता है। इसलिए कृत्रिम गर्भधारण कराकर नंदी पैदा न कर बछिया पैदा करो। बछिया पैदा होने से दूध की नदियां बहेंगी।
उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री का सपना है कि किसानों की आय दोगुनी हो। लेकिन इसके लिए किसानों को अपनी खेती बदलनी पड़ेगी। बकरी, मधुमक्खी, मुर्गी सहित जैविक खेती करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जिसे जो पीता है वही दहाड़ता है। उन्होंने लोगों से कहा कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाओ। वे बच्चे बड़े होकर आपकी जिंदगी बदल देंगे।
कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गाय अभयारण्य से क्षेत्र के किसानों को भी लाभ हुआ है। अब सड़कों पर गोवंश दिखाई नहीं देंगे। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने भी विचार रखे।
गाय से आती है दुनिया की सबसे अच्छी खुशबू
प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि अखिलेश यादव को गोशाला से बदबू आती होगी। लेकिन हमें तो दुनिया की सबसे अच्छी खुशबू गाय, गोमूत्र और उसके गोबर से आती है। जब लोगों का स्टैंडर्ड बढ़ जाता है तो उन्हें बदबू आनी शुरू हो जाती है।
42 एकड़ भूमि में 63 करोड़ से बना गाय अभयारण्य
श्री गोवर्धन गो सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में तुगलकपुर कम्हेड़ा में गाय अभयारण्य का लोकार्पण और कृत्रिम गर्भाधान व कृषक प्रशिक्षण केन्द्र का शिलान्यास किया गया। अभयारण्य बनाने का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को समाहित करना है। यह 42 एकड़ जमीन में बनाया गया है और इसे बनाने में 63 करोड़ रुपये का खर्चा आया है। कुल क्षमता पांच हजार पशुओं की है। अब तक गौ अभयारण्य में करीब तीन हजार पशु पहुंच चुके हैं। यहां जल्द ही गाय नस्ल सुधार केंद्र भी बनाया जाएगा। नस्ल सुधार से गाय दूध अधिक देंगी।
इसके अलावा गौ अभयारण्य में एक अस्पताल भी स्थापित किया गया है। जहां गायों का उपचार किया जाता है। यहां पर मौजूद गायों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर चार लाख रुपये प्रतिदिन का खर्च होता है। गाय अभयारण्य से करीब 200 लोगों को रोजगार मिला है।