फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी की तरह बहता रहा पानी के लिए आया पैसा

विज्ञापन
विज्ञापन
पानी की तरह बहता रहा पानी के लिए आया पैसा
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। भ्रष्टाचार के खेल में लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए आया पैसा पानी की तरह बहाया जाता रहा है लेकिन परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई। पेयजल परियोजनाओं को लंबे समय तक लटका रखा और उनका खर्च बढ़ता गया। अफसरों और ठेकेदारों का ऐसा बड़ा खेल है कि दोगुना पैसा खर्च करके भी योजनाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं।
अधिशासी अभियंता पीके अग्रवाल के निंबलन से पहले यहां पाइप घोटाला खुल चुका है। डीएम को रिश्वत का लिफाफा देने के मामले में एक एक्सईएन जेल भी जा चुका है। यहां चल रही पेयजल योजनाओं के खर्च की जांच हो जाए तो और भी फर्जीवाड़े सामने आएंगे। जिले में काली नदी के किनारे के गांवों में प्रदूषित जल की समस्या को लेकर गांवों में स्वच्छ पेयजल योजना स्वीकृत हुई हैं। 2013-14 में जिले में जो 24 योजनाएं शुरू हुईं, उनमें 32 प्रतिशत कम में टेंडर छोड़ा गया। यानी जिस योजना पर एक करोड़ का खर्च होना था उसका ठेका 68 लाख में छूटा। टेंडर ब्लो पर लिए गए। 80 प्रतिशत काम एक ही फर्म के नाम चला गया। ठेकेदार ने यह कहते हुए सरेंडर कर दिया कि वह काम पूरा नहीं कर पाएगा। जो काम हुआ उसका भुगतान कर दिया गया। जिस ठेकेदार के नाम काम था, उसी की दूसरी तीन फर्मों को एक्सईएन ने सीधे टुकड़ों में काम दे दिया। कमाल की बात यह है कि इन योजनाओं के लिए जो पैसा निर्धारित था, उससे दोगुना खर्च हो गया और काम अभी तक भी पूरे नहीं हुए हैं। जेई और एई इस प्रकार बिल तैयार करते हैं कि यह पता ही नहीं लगा कि इन योजनाओं पर दोगुना पैसा कैसे चला गया। जल निगम का आलम यह है कि एक अधिशासी अभियंता तो यहां तत्कालीन डीएम संतोष यादव को 50 हजार का लिफाफा देने के मामले में जेल जा चुके हैं। कई बार शासन स्तर से सीधे जांच हुई है। यहां घटिया पाइप प्रयोग करने का मामला भी उजागर हो चुका है। विभाग का आलम यह है कि कुछ जेई, ठेकेदारों की गाड़ी में ही घूमते हैं। यह मामला तो सामने आ गया, इससे पहले कितने बिल पास हुए होंगे, इसकी जांच होनी चाहिए। जल निगम में चल रही योजनाओं की जांच हो जाए तो करोड़ों का घोटाना सामने आ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सीडीओ ने एक सप्ताह पहले ली थी बैठक
मुजफ्फरगनर। सीडीओ आलोक यादव ने जल निगम के समस्त ठेकेदारों की एक सप्ताह पहले बैठक ली थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि किसी ठेकेदार का भुगतान तो नहीं रुका है। यदि भुगतान रुका है तो वह तुरंत किया जाएगा। उस समय किसी भी ठेकेदार ने शिकायत नहीं की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें