केंद्र की मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट से किसान नाखुश हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें बजट से जो आशाएं थी, वह वित्तमंत्री पूरी नहीं कर पाए हैं। किसानों ने बजट को चुनावी पृष्ठभूमि तैयार करने वाला करार दिया है। किसानों का कहना है कि फसल के लागत मूल्य में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी।
किसानों को अरुण जेटली के आम बजट से काफी उम्मीदें थी। किसानों का अनुमान था कि मोदी सरकार अपने अंतिम पूर्ण बजट में किसानों का जरूर ख्याल रखकर उनके हित में घोषणा करेंगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। बजट से किसानों में निराशा है।
भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत का कहना कि बजट किसान हित में नहीं है। बजट में डॉ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों का लागत मूल्य डेढ़ गुणा बढ़ाने की घोषणा की गई है, जबकि फसलों का लागत मूल्य बहुत कम आंका जाता है। बढ़ाना ही था कि फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए था।
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह कहते है कि जेटली के पिटारे से निकले बजट ने किसानों को मायूसी के अलावा कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि किसानों की आय दुगुना करने का मोदी सरकार कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं कर पाई है।
बधाईकलां के प्रगतिशील किसान अरविंद मलिक का कहना है कि सिंचाई के उपकरणों और कृषि यंत्रों पर लागू कर शून्य किया जाता तो बेहतर होता। रतनपुरी के किसान सुभाषचंद्र सोम कहते हैं कि बजट किसान विरोधी है। सरकार केवल लोक लुभावनी घोषणाएं कर रही है। बजट में किसानों के हित में कुछ खास नहीं किया गया है।
बड़सू के किसान तरसपाल सिंह ने बजट को किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा बताया। कहा कि सरकार किसानों की गेहूं की फसल का लागत के आधार पर कम से कम 2400 रुपये क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य घोषित करें।
अब देखना यह है कि सरकार किसानों की फसल का लागत मूल्य क्या आंकती है। कैलाशनगर के किसान सुधीर शर्मा का कहना है कि बजट में किसानों को खाद, बीज, कृषि यंत्रों पर भी कोई राहत नहीं दी गई है। बजट किसानों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है। बजट ने किसानों को निराश किया है।
मोदी सरकार के बजट से किसान नाखुश
खतौली। केंद्र की मोदी सरकार के बजट से आम लोगों को निराशा हाथ लगी है। किसान ठाकुर लक्ष्मण सिंह का कहना है केंद्र सरकार का बजट किसानों के लिए हितकारी नहीं है। लोकलुभावन बजट पेश करके किसानों को गुमराह करने का काम किया गया है। किसानों को भाजपा सरकार से काफी उम्मीदें थी, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
यह बजट किसान को लाभ नहीं पहुंचाएगा। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि बजट में किसानों को ऋण देने के लिए 11 लाख करोड़ की लिमिट की गई, जबकि कांग्रेस की सरकार में 10.88 लाख करोड़ थी। इसमें कोई खास अंतर नहीं है। बजट में किसानों की उत्पादन लागत से डेढ़ गुणा मूल्य देने की घोषणा की गई।
डेढ़ गुणा मूल्य से किसानों का भला नहीं होगा। कपिल सोम का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार का आखिरी बजट किसानों के लिए फायदा पहुंचाने वाला नहीं है। डेढ़ गुणा फसलों का दाम देने वाले बजट से किसान कभी खुशहाल नहीं हो सकता है। महंगाई के दौर में किसान के लिए यह बजट हितकारी नहीं है।
चंदर राठी का कहना है कि बजट किसानों के लिए कम है। बजट में किसानों की सभी फसलों का दाम डेढ़ गुणा बढ़ाया जाना चाहिए था। इस बजट से किसान की मेहनत का भी पैसा पूरा नहीं मिल सकेगा। सरकार का बजट किसान हित में नहीं है।
चौधरी जयपाल सिंह का कहना है कि आज की महंगाई को देखते हुए किसानों के लिए बजट न के बराबर ही है। किसानों को इस सरकार से उम्मीद थी कि आखिरी बजट में उनको फायदा मिलेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ तथा यह बजट किसान हित में नहीं है।