हत्याकांड के दोनों आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
अवैध संबंधों के शक में रची गई थी हत्या की साजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की हत्या अवैध संबंधों के शक में की गई थी। आरोपी वीरसैन को संदेह था कि राजेंद्र उसकी पत्नी से बातचीत करता है। इसी शक के चलते हत्या की साजिश रची गई।
चार जून 2018 को आरोपियों ने राजेंद्र को अपने साथ मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गए। आरोप है कि उसे शराब पिलाने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी गई और पहचान मिटाने के लिए शव को जला दिया गया।
जंगल में मिला था जला हुआ शव
पांच जून 2018 को मीरापुर थाना क्षेत्र के खेड़ी गांव के जंगल में एक जला हुआ शव बरामद हुआ था। मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के मौड़ कलां निवासी महावीर की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
बाद में शव की पहचान ककरौली निवासी 26 वर्षीय राजेंद्र सैनी के रूप में हुई। इसके बाद मृतक के भाई जयविंद्र ने 11 जून 2018 को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
आठ साल बाद हत्याकांड में दो दोषियों को फांसी
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तीन आरोपियों के खिलाफ चली थी सुनवाई
पुलिस ने जांच के बाद वीरसैन, गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी वीरसैन की मृत्यु हो गई। बाकी दो आरोपियों गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी रही। बुधवार को दोनों को दोषी करार दिया गया था।
हत्याकांड के दोनों आरोपी
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विरल से विरलतम मानकर सुनाई फांसी
शनिवार को अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और समाज को झकझोर देने वाला है, इसलिए इसे विरल से विरलतम श्रेणी में रखा गया। इस फैसले के साथ आठ वर्ष पुराने इस बहुचर्चित हत्याकांड का न्यायिक अध्याय महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया।