सिविल लाइन थाने में तैनात दरोगा गौरव चौधरी ने साइबर ठगी के मामले से जुड़ी एक शिकायत में पीड़ित से ही 11 लाख रुपये वसूल लिए। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोप में दरोगा को निलंबित कर दिया। उन्होंने एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ से मामले की जांच कराने के बाद कार्रवाई की।
मदीना कॉलोनी बझेड़ी रोड पर प्लास्टिक दाना बनाने की फैक्टरी चलाने वाले मदीना कॉलोनी निवासी नदीम ने एसएसपी से शिकायत कर कहा था कि उसकी फैक्टरी का खाता उसका अकाउंटेंट लद्धावाला निवासी फराज देखता था। 13 अक्तूबर 2025 को उसके खाते में दो बार में 95 लाख रुपये जमा हुए। यह रुपये कुछ ही देर में विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर लिए गए थे।
शक होने पर उन्होंने बैंक में जाकर खाता व अपना मोबाइल नंबर बंद करा दिया। सिविल लाइन थाने पहुंचकर प्रार्थना पत्र देकर उसे रिसीव करने को कहा। अगले दिन थाने पहुंचने पर थाना प्रभारी से वार्ता हुई। तो उन्होंने अपने पास मौजूद दरोगा गौरव चौधरी को इस मामले को देखने को कहा।
दरोगा ने उनकी शिकायती लेने से इन्कार करते हुए उल्टा उन्हें ही जेल भेजने की धमकी दी। बाद में कॉल कर उन्हें बुलाकर जांच करने के नाम पर उनका मोबाइल व लैपटॉप ले लिया। कहा गया कि केरल व कर्नाटक में धोखाधड़ी हुई है। उसे मामला खत्म करने की बात कहते हुए दस लाख रुपये की मांग की। छह लाख रुपये दे दिए गए। तब मोबाइल व लेपटॉप लौटा दिया। 15 दिन बाद पांच लाख रुपये लिए गए। एसएसपी ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दरोगा को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है।