साल 2017 में एक आरोपी ने अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके चलते उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। दूसरे आरोपी के प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या पांच ने की। अदालत ने दोषी को धारा 324 में एक साल का साधारण कारावास और आर्म्स एक्ट में भी एक साल साधारण कारावास की सजा सुनाई।
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बचाव पक्ष ने अदालत में बताया कि दोषी एचआईवी और टीबी से ग्रस्त है। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अदालत धारा चार के अंतर्गत दोषी को परिवीक्षा पर छोड़ दिया। दोषी ने व्यक्तिगत बंध पत्र दिया कि जब उसे बुलाया जाएगा, वह हाजिर होगा।