एक अक्तूबर 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।
सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी पत्रावली में दिवंगत बृजेश कुमार को तत्कालीन एसओ मंसूरपुर राधा मोहन द्विवेदी के साथ आरोपी बनाया था। इस प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 में चल रही है। अधिवक्ता श्रवण कुमार ने बताया कि हेड कांस्टेबल को बीमारी के चलते अलीगढ़ में ही भर्ती कराया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका है।
इनके खिलाफ दाखिल किया था आरोपपत्र
सीबीआई ने राधा मोहन द्विवेदी, कृपाल सिंह, महेश चन्द्र शर्मा, नेत्रपाल सिंह, सुमेर सिंह, देवेन्द्र सिंह, सतीश चन्द्र शर्मा, तमकीम अहमद, मिलाप सिंह, सुरेन्द्र सिंह, ब्रजेश कुमार, कंवरपाल सिंह, प्रबल प्रकाश, राकेश कुमार मिश्रा, वीरेन्द्र कुमार, संजीव कुमार भारद्वाज, राकेश कुमार सिंह, कुशल पाल सिंह, राजपाल सिंह, विरेन्द्र प्रताप, विजयपाल सिंह, नरेश कुमार त्यागी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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