दहशत के साये में ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर गुजारी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। उत्तराखंड के चमोली में हुई प्राकृतिक आपदा के चलते खादर क्षेत्र के ग्रामीण रातभर चिंतित रहे। फसल डूबने की चिंता और पानी आने की आशंका में ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर गुजारी। सोमवार को हालात सामान्य होने पर ग्रामीण अपने अपने घर को लौट गए।
उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर के फटने से गंगा में भी बाढ़ की आशंका बन गई थी। जिला प्रशासन ने भी खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की आशंका के चलते ग्रामीणों को खेतों से घर लौट आने और सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की चेतावनी जारी की थी। इस बाबत खादर क्षेत्र के गांव से ग्रामीणों में अफरातफरी उत्पन्न हो गई थी। ग्रामीण खेतों से अपना कीमती सामान समेट घर लौट आए थे। वहीं, निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीण भी अपने कीमती सामान व पशुओं के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे। रविवार को रातभर ग्रामीण बाढ़ आने की आशंका से होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित रहे। अधिकांश ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर काटी। सोमवार सुबह भी ग्रामीणों में बाढ़ को लेकर अनिश्चितता की स्थिति थी, जिसके चलते वे एक-दूसरे से उत्तराखंड के हालिया हालात की जानकारी लेते रहे। हालात पूरी तरह सामान्य होने पर आखिरकार ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और अपने रोजमर्रा के काम शुरू किए। ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए ग्रामीण भी अपने काम और घरों में लौट आए हैं। गंगा का पानी नहीं बढ़ने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
भाजपा नेता हरसंभव मदद को तैयार
मोरना। रविवार को उत्तराखंड त्रासदी के बाद खादर क्षेत्र में बाढ़ की आशंका के चलते सोमवार सुबह भाजपा नेता डॉ वीरपाल निर्वाल, रामकुमार शर्मा, प्रदीप निर्वाल, महेंद्र सिंह चौहान आदि खादर क्षेत्र के गांव महाराज नगर में पहुंचे। पूर्व प्रधान बुद्धराम के आवास पर ग्रामीणों से वार्ता कर बाढ़ आने की स्थिति में उन्हें हरसंभव मदद की बात कही। हालांकि दोपहर बाद हालात सामान्य होने पर इसकी नौबत ही नहीं आई। गांव मजलिसपुर तोफीर के प्रधान योगेश चौहान, अंकित, पवन, शिवकार, दीपचंद, बनारसी दास, योगेश और राकेश ने अफसरों की त्वरित कार्रवाई और भाजपा नेताओं के मदद के आश्वासन पर उनका आभार व्यक्त किया।