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फिंगरप्रिंट डाटा न होना वारदात के खुलासे में बाधक

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फिंगरप्रिंट डाटा न होना वारदात के खुलासे में बाधक
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मुजफ्फरनगर। किसी भी आपराधिक वारदात के खुलासे में फिंगरप्रिंट अहम साक्ष्य होता है, लेकिन घटनास्थल से अपराधियों के फिंगरप्रिंट लिए जाने के बावजूद डाटा न होने से इन साक्ष्यों का मिलान संभव नहीं हो पाता। इसके चलते फिंगरप्रिंट अहम साक्ष्य होने के बावजूद वारदात के खुलासे में पुलिस को इनसे मदद नहीं मिल पाती है।
जनपद में अधिकांश वारदातों में फोरेंसिक जांच की व्यवस्था है। इसके तहत संगीन वारदातों में घटनास्थल से अपराधियों के फिंगरप्रिंट भी लिए जाते हैं, क्योंकि फिंगरप्रिंट किसी भी वारदात के खुलासे में अहम साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। अधिकांशत: होता यह है कि घुमंतू जनजातीय गिरोह द्वारा की जाने वाली आपराधिक वारदातों के मामले में अपराधी नाम-पते के साथ ही ठिकाना तक बदल लेते हैं। ऐसे में गिरफ्तारी के समय इनकी संगीन वारदातों में संलिप्तता की पुष्टि करने के लिए घटनास्थल से फिंगरप्रिंट लिए जाने की यह व्यवस्था की गई थी, लेकिन डाटा संग्रहित न होने से अपराधियों की पहचान की यह व्यवस्था अतार्किक हो चुकी है। दरअसल, पुलिस द्वारा अपराधियों के फिंगरप्रिंट तो लिए जाते हैं, लेकिन अपराधियों का डाटा बैंक ही सूबे में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में फिंगरप्रिंट लिए जाने के बावजूद इनसे किसी भी संगीन घटना के खुलासे में पुलिस को किसी तरह का सहयोग नहीं मिलता है।
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लखनऊ में तैयार किया जा रहा फिंगरप्रिंट डाटा बैंक
मुजफ्फरनगर। फिंगरप्रिंट लिए जाने के बावजूद इनका डाटा बैंक न होना अब तक घटनाओं के खुलासे में बाधक रहा है। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि अब लखनऊ में प्रदेश भर के अपराधियों का फिंगरप्रिंट डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद फिंगरप्रिंट लिए जाने के बाद वहां से उनका मिलान कर अपराधियों पर शिकंजा कसा जाना मुमकिन हो पाएगा।
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