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Muzaffarnagar: महंगे मोबाइल न खरीदें किसान, रिश्तेदारों को दे रुपये, जानें राकेश टिकैत ने ऐसा क्यों कहा

Sun, 17 Aug 2025 06:55 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

मासिक पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि स्कूल बंद होंगे तो गांव-गरीब के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। किसानों को एकजुट होना होगा।
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मासिक पंचायत में बोलते राकेश टिकैत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की स्कूलों को बंद करने की तैयारी से देहात क्षेत्र में पढ़ाई बाधित होगी। गांव और गरीब के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। दूर के स्कूलों में बच्चों के आवागमन का क्या इंतजाम किया गया है। जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे। स्मार्ट मीटर का विरोध भी कर रहे हैं। 

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किसान भवन पर भाकियू की मासिक पंचायत में टिकैत ने कहा कि किसानों को एकजुट होकर फिजूलखर्ची और नशे जैसी बुरी लत से बचने की जरूरत है। एक साल की गन्ने की आमदनी से भी अधिक महंगे मोबाइल किसान खरीद रहे हैं। समझना होगा, यह एक साइलेंट वार है। किसान की आमदनी तभी बढ़ेगी, जब वह अपने खर्चों पर नियंत्रण रखेगा।

गेहूं, चावल, उड़द जैसी नगदी फसलों का उत्पादन कर आय के साधन बढ़ाने की ओर ध्यान देना होगा। युवाओं से आह्वान किया कि वह पढ़ाई और व्यावसायिक रोजगार की ओर ध्यान दें। संचालन ओमपाल मलिक ने किया।इस मौके पर जिलाध्यक्ष नवीन राठी, गौरव टिकैत, शांता कुमार, अनुराग, अनिल मलिक, ओमपाल मलिक, कपिल खाटियान, मांगे राम ,अंकुर, ब्रिजेश मौजूद रहे। 

त्योहारों पर दिखावा नहीं, रुपये का लेन-देन करें
भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि लोग त्योहारों पर कपड़े, मिठाई और अन्य सामान खरीदते हैं। दिखावे के बजाए, वास्तविक मदद की तरफ कदम बढ़ाएं। रिश्तेदारों को कपड़े-मिठाई देने के बजाए पैसे दें, ताकि वह ज़रूरत के हिसाब से खर्च कर सकें।

किसान तकनीकी ज्ञान भी हासिल करें
पंचायत में कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बिजली मिस्त्री, ट्रैक्टर मिस्त्री, वाहन मरम्मत जैसे तकनीकी कार्यों की ओर भी रुख करना चाहिए। इससे उन्हें रोजगार मिलेगा और आमदनी के नए रास्ते खुलेंगे। आर्थिक मजबूती मिलेगी।
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किसानों को किया जाएगा सम्मानित
भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि जो किसान अपने पशुओं और खेती के महंगे औजारों को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखेगा, उसे संगठन की ओर से सम्मानित किया जाएगा। कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह पुराने कार्यकर्ताओं के घर जाकर उनके परिवारों को फिर से संगठन से जोड़ें और गांव-गांव संगठन को मजबूत करें। मासिक पंचायत का इतिहास चार दशक पुराना है, जिसकी शुरुआत किसानों की बहुत सीमित संख्या से हुई थी, लेकिन संगठन के साथ-साथ मासिक पंचायत भी मजबूत होती गई।
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