जिले में एफएसडीए मुख्यालय की ओर से जांच कराई थी, जिसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली सामने आई है। एलाइजा रिपोर्ट तो छिपाई ही, साथ ही सहारनपुर से बिना नियम पालन किए 90 यूनिट ब्लड भी लाया गया। खून की जांच और रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी मिली है।
खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) मुख्यालय की विशेष टीम की ओर से की गई ब्लड बैंकों की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। जांच में साबित हो रहा है कि ब्लड बैंकों के संचालन में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। एक की जांच में सामने आया कि रक्तदाता की एलाइजा रिपोर्ट को छिपाया जा रहा था। बहाना बनाया गया कि प्रिंटर खराब था। वहीं, खून की जांच और भंडारण के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां पाई गई हैं।
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जनपद में खुले निजी ब्लड बैंकों में भारी अनियमितता सामने आई हैं। पिछले दिनों खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से गाजियाबाद, इटावा, बरेली, संभल और लखनऊ मुख्यालय से पहुंचे अधिकारियों ने जनपद के सात ब्लड बैंक की जांच की। जांच के बाद दुर्गा चेरिटेबल ब्लड सेंटर महावीर चौक व सर्वोदय चेरिटेबल भोपा रोड के ब्लड बैंक पर खून का संचालन रोक दिया गया।
खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की टीम की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आया कि इन ब्लड बैंक के पास यह रिकॉर्ड भी सही प्रकार से नहीं रखा जा रहा कि खून की आपूर्ति कहां से हो रही है। इन निजी ब्लड बैंक में प्रोफेशनल डोनर खून दे रहे हैं। लेकिन उसकी निगरानी तक नहीं हो रही।
एलाइजा जांच क्यों है जरूरी
जिला औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य ने बताया कि दुर्गा चेरिटेबल ब्लड सेंटर महावीर चौक पर एलाइजा जांच का रिकॉर्ड मेनटेन नहीं किया जा रहा था। एलाइजा एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला परीक्षण (टेस्ट) है। इसका उपयोग रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों में विशिष्ट एंटीबॉडी या एंटीजन का पता लगाने और उन्हें मापने के लिए किया जाता है। जैसे एचआइवी, कोविड-19, या हेपेटाइटिस। उन्होंने कहा कि लिए गए खून की यह जांच नहीं की जाएगी तो समझा जा सकता है कि उससे कितना बड़ा नुकसान संभव है।
बिना ट्रांसपोर्ट वैन दूसरे जनपद से लाए 90 यूनिट खून
जिला औषधि निरीक्षक ने बताया कि भोपा रोड स्थित सर्वोदया ब्लड बैंक की जांच में भी कई खामियां मिलीं। बताया कि जांच में सामने आया कि ब्लड बैंक की ओर से बिना उचित नियमों का पालन किए 90 यूनिट खून दूसरे जनपद से ले लिया गया। उन्होंने बताया कि सहारनपुर ब्लड बैंक से 90 यूनिट खून बल्क में लाया गया था लेकिन ब्लड बैंक संचालक ट्रांसपोर्टर वैन का रिकार्ड नहीं दिखा सके। उन्होंने बताया कि गैर जनपद से खून लाने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना पड़ता है।
खून लेने वालों के लिए जारी की गई एडवायजरी
जिला औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य ने बताया कि खून लेने वाले लोगों के लिए एडवायजरी जारी की गई है। जिसमें महत्वपूर्ण ये है कि यदि किसी मरीज के लिए ब्लड बैंक से खून लेना हो अथवा एक्सचेंज कराना हो तो तीमारदार स्वयं जाए और देख लें कि ब्लड बैंक पंजीकृत है कि नहीं।