पहले आतिया, फिर शगुफ्ता और अब रेशमा तीन तलाक के खिलाफ उठ खड़ी हुई है। प्रधानमंत्री को तीन तलाक के नियमों में संशोधन के लिए पत्र भेजा है और आपबीती लिखते हुए इंसाफ की मांग की है।
रेशमा को उसके पति ने निकाह के एक माह बाद ही फोन पर तलाक दे दिया था। 2011 में निकाह हुआ था और एक सप्ताह बाद ही छोड़ दिया। फिर तलाक देकर उसकी जिंदगी बर्बाद कर डाली। एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। छह साल से न्याय के लिए भटक रही है।
शहर के बेहट रोड स्थित मोहल्ला गंगोत्री विहार निवासी रेशमा ने बृहस्पतिवार को तीन तलाक के कानून में संशोधन की जरूरत बताते हुए पत्र लिखा है और अपने लिए भी इंसाफ की मांग की है। 28 वर्षीय रेशमा बताती है कि उसका निकाह 2011 में देहरादून के मोहल्ला शिवपुरी निवासी इश्तेखार के साथ हुआ था। रेशमा का आरोप है कि इश्तेखार ने उसे अपने पास एक सप्ताह रखने के बाद उसके मायके भेज दिया।
वह उसके आने का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं आया। वह फोन भी करती रही, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। लगभग एक माह बाद इश्तेखार का फोन आया और फोन पर ही उसने तीन बार तलाक, तलाक, तलाक कह दिया। उसने कहा कि अब उसका उससे कोई रिश्ता नहीं है।
चंद मिनटों में ही उसके सारे सपने जैसे बिखर गए। उसने अपनी गलती पूछने का भी प्रयास किया कि उसकी जिंदगी से ऐसा खिलवाड़ क्यों कर रहा है, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ दिन बाद पता चला कि उसने किसी दूसरी लड़की से निकाह कर लिया है। जिस पर उसके होश उड़ गए। बिना किसी गलती के उसकी जिंदगी तबाह हो गई। उसने 2012 में इश्तेखार के खिलाफ महिला थाने में तहरीर दी।
कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराई। तब से वह लगातार थाना एवं कचहरी के चक्कर काट रही है और उसको तलाक देने वाला पति उसकी जिंदगी बर्बाद करके आराम से रह रहा है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले तीन तलाक को लेकर जो वायदा किया था उस पर वह अमल करें। जिससे उसे और उन जैसी महिलाओं को न्याय मिल सके।
आतिया और शगुफ्ता ने भी भेजा है पीएम को पत्र
सहारनपुर। रेशमा से पहले तीन तलाक के विरोध के दो और मामले सामने आए हैं। आली चुुंगी निवासी आतिया साबरी ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय के लिए अपील की है और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। इसके अलावा नानौता की शगुफ्ता ने भी तीन तलाक के कानून में संशोधन की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।