मुजफ्फरनगर। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में विफल रहने पर चार वर्ष पूर्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नगर पालिका पर लगाए 99 लाख के जुर्माने की अब तहसील सदर से रिकवरी जारी हो गई है। हाल ही में एनजीटी के 68 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करने वाली नगरपालिका को अब झटका लगा है। पालिका से 99 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
साल 2011 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नगरपालिका ने किदवईनगर में एटूजेड कंपनी के साथ मिलकर प्लांट लगाया था। जो बाद में बंद हो गया था। जिसके बाद शहर से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट को बिना मैनेजमेंट वहां पर डंप किया जाने लगा। शिकायत होने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किदवईनगर प्लांट का टीम बनाकर निरीक्षण कराया। शिकायत को सही पाए जाने पर 2020 में नगरपालिका को पर्यावरणीय क्षति का दोषी पाते हुए 99 लाख रुपये का दंड अधिरोपित करने के साथ ही कारण बताओ नोटिस दिया गया था।
पालिका की ओर से उस समय इस नोटिस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कोई जवाब नहीं दिया गया था। इसके बाद बोर्ड ने एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करने पर अधिरोपित 99 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में अर्थदंड वसूलने के लिए कार्यवाही प्रारंभ की। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ के मुख्य पर्यावरण अधिकारी वृत्त-3 की ओर से सप्ताह में यह राशि जमा कराने के आदेश पालिका प्रशासन को दिए थे। लेकिन यह राशि जमा कराने या इसके खिलाफ अपील को लेकर कोई भी कदम नहीं उठाए जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 99 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति अर्थदंड के रूप में वसूल किए जाने को लेकर तहसील सदर के माध्यम से पालिका प्रशासन को आरसी नोटिस जारी कर दिया गया है। शुक्रवार को नायब तहसीलदार शहर ने संग्रह अमीन के साथ पालिका पहुंचकर आरसी नोटिस रिसीव करा दिया है। 15 दिन का समय पालिका प्रशासन को दिया गया है।