कूड़ा निस्तारण के लिए पालिका के पास जगह नहीं
मुजफ्फरनगर, खतौली। कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिका के पास कोई जगह नहीं है। नतीजतन कूड़े को गंगनहर के निकट स्थित खाली पड़ी भूमि पर ही डाला जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए गाजियाबाद के एक कंपोजिट प्लांट संचालक को टेंडर दिया गया है। वहीं, नगर की साफ सफाई के लिए गाड़ियां लगाई गई है। यदि पिछले वर्ष की बात करें तो स्वच्छता अभियान के तहत राज्य में स्थित नगरपालिकाओं में कस्बे की नगरपालिका 24 वे नंबर पर थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 37 वां स्थान दर्ज कराया था। इस बार अच्छे नंबर पाने के लिए पालिका प्रशासन स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान में जुटा है।
मार्च से जून तक होती है नालों की सफाई
बरसात आने से पहले नगरपालिका द्वारा नालों की साफ सफाई के लिए मार्च से लेकर जून तक काम किया जाता है। पिछले वर्ष भी इन्हीं दिनों में काम किया गया था। अतिरिक्त तीस मजदूर लगाकर उनसे तीन महीने काम कराया गया। कर्मचारियों, वाहनों, मशीनरी सहित लगभग 15 लाख रुपये का खर्च आया था। उसके बाद नगरपालिका कर्मचारियों से ही साफ सफाई का काम कराया जाता है।
यह है व्यवस्था
नगर की साफ सफाई के लिए नगर के 25 वार्डों में 12 गाड़ियां कूड़ा उठाने के लिए लगाई गई है। जो डोर टू डोर जाकर कूड़ा एकत्र करा रहा है। इस कूड़े को गंगनहर के पास स्थित खाली भूमि में डाल दिया जाता है। प्रतिदिन के हिसाब से 25 वार्डों से करीब 25 टन कूड़ा निकलता है। गाजियाबाद की कंपोजिट प्लांट के कर्मचारी कूडे़ को ले जाते हैं। पालिका को एक हजार रुपये टन का भुगतान दिया जाता है।
यह कर रहे तैयारी
नगर के वार्डों में जहां छोटी गली है, वहां तक कूड़ा उठाने के लिए गाड़ियां नहीं जा पा रही है। पालिका द्वारा 50 ट्राईसाइकिल व 25 रेहडे़ खरीदे गए है। इन पर गीला और सूखा कूड़ा उठाने के लिए बॉक्स लगे हैं। इनके द्वारा आने वाले कूड़े को एक जगह रखकर उसमें से प्लास्टिक व अन्य कबाड़ को अलग कराकर उसे बेचा जाएगा, जिससे पालिका की आय में वृद्धि हो सके।
सफाई निरीक्षक नेपाल सिंह ने बताया कि पालिका की आय बढ़ाने और नगर को स्वच्छ रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कूड़े को डोर टू डोर उठवाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पालिका में जो दर्ज है उन मकानों का आंकड़ा 15 हजार है, लेकिन सर्वे कराया जा रहा है। यह आंकड़ा 18 हजार के पार होगा। ऐसी नीति बनाई जा रही है कि डोर टू डोर से कूड़ा उठाने के लिए हर घर पर कुछ सुविधा शुल्क लगाया जाएगा, जिससे पालिका की आय में वृद्धि हो और लगाए गए कर्मचारियों को वेतन भी दिया जा सके।