देहात में भी मोहर्रम की दस तारीख पर मातमी जुलूस निकाले गए। शिया सोगवारों ने दहकते अंगारों और तलवार, बरछी, छूरियों से मातम किया। करबला पहुंच कर जुलूस समाप्त हुए, जहां पर ताजिए दफनाए गए।
मीरापुर में मोहर्रम की 10वीं तारीख पर मातमी जुलूस निकाले गए। एक जुलूस पंचदरा इमामबाड़ा से शुरू होकर मेन बाजार से होता हुआ करबला पहुंचा। जुलूस में शिया सोगवारों ने करबला के शहीदों को यादकर मातम किया। नौहा ख्वानी सरफराज हेदर अली ने की। जुलूस में हैदर, मेहंदी, नजीर हैदर जैदी, मुंतजिर जैदी, सज्जाद हैदर, शाही रजा, हसन हैदर, शमशुल हसन आदि शामिल रहे।
भेापा में मोहर्रम की दसवीं तारीख को शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकाला। करबला के शहीदों की शहादत को याद किया। भोपा क्षेत्र के गांव जौली, गादला, रसूलपुर, रहकड़ा, बेलड़ा, बेहड़ा थ्रू, यूसुफपुर में मोहर्रम पर मौलानाओं ने तकरीर में कहा कि ये मजलिसें ये अजादारी हुसैनी आदि खुदा की नेमतो में से एक है। शिया सोगवारों द्वारा मातमी जुलूस निकालकर करबला की शहादत को याद किया गया। रहकड़ा में नौ तारीख की रात में महिलाओं और बच्चों ने जागकर इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया। मौलाना फरमान हैदर, इमरान मेहंदी, आजिम शबाब जैदी, नवाब हैदर, शबी हैदर परवेज, मियां मटरू मौजूद रहे।
छपार में मोहर्रम के त्योहार पर सोगवारों ने मातमी जुलूस निकालकर करतब दिखाए। उसके बाद कब्रिस्तान में ताजियों को दफनाया गया। मोहल्ला काजियान से जुलूस शुरू होकर हाईवे बाजार होता हुआ रोहाना मार्ग स्थित करबला पहुंचा, जहां जाकर ताजियों को दफनाया गया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।