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घर के कलह में होती है सबसे ज्यादा आत्महत्या

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घरेलू कलह में होती है सबसे ज्यादा आत्महत्या
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस:-
मुजफ्फरनगर। घर से लेकर बाहर तक तनाव ही तनाव। कहीं भी जाएं तनाव लोगों का पीछा नहीं छोड़ता। भागदौड़ की जिंदगी में हर शख्स परेशान ही नजर आता है।
लोगों को जागरूक करने और तनाव से बचाने के लिए हर साल दस अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। डब्ल्यूएचओ की ओर से इस बार की थीम है, आत्महत्या से बचाव। पुलिस के रिकार्ड के अनुसार जिले में एक साल में लगभग एक सौ से अधिक लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे ज्यादा आत्महत्या यहां पारिवारिक कलह में हो रही है। पति-पत्नी के बीच विवाद जानलेवा साबित हो रहा है। पढ़ाई को लेकर टीनेजर पर दबाव आत्महत्या का कारण बन रहा है। जिले में सबसे ज्यादा आत्महत्या खुद को गोली मारकर हो रही है। जहर खाकर मरने की घटना दूसरे नंबर पर है।
जिला चिकित्सालय में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज शर्मा कहते हैं कि भारत में प्रत्येक पांच मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। प्रत्येक जगह आत्महत्या के अलग-अलग कारण है। जिले में जो स्टडी की गई है, इसके हिसाब से यहां आर्थिक तनाव में बहुत कम आत्महत्या होती है। यहां पारिवारिक कलह आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण है। समाज में जिस तरह का परिवर्तन आ रहा है, ऐसे में घरों में विवाद बढ़ रहे है। एक स्थिति ऐसी आती है कि आदमी जीने की इच्छा छोड़ देता है। सबसे खतरनाक चीज यह है कि इस जिले में जो आत्महत्या होती है, उसमें सबसे ज्यादा खुद को गोली मारकर आत्महत्या करते हैं। दूसरे नंबर पर जहर खाकर मरने की घटनाएं हैं। कुछ लोग ट्रेन के आगे और नहर में कूदकर भी जान देते हैं। कुछ फांसी का फंदा बनाकर उस पर झूल जाते हैं। सबसे चिंता की बात छात्रों के आत्महत्या करने की है। माता-पिता बच्चों पर इतना दबाव दे रहे हैं कि अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतर पाने पर बच्चा आत्महत्या की सोचने लगता हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी अपने में सुधार करना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने 70 कॉलेजों का चयन करके उनमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्यशाला चलाने का निर्णय लिया है।
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जिले के प्रमुख समाजशास्त्री एवं डीएवी कॉलेज में विभागाध्यक्ष रहे डॉ कलम सिंह का कहना है कि समाज में तेजी के साथ व्यक्तिवाद बढ रहा है। हमारी नई पीढ़ी परिवार से कटती जा रही है। पीढ़ियों के बीच गैप हो रहा है। इच्छाएं बहुत ज्यादा हो गई हैं। संसाधन उतने है नहीं, इस कारण लोग तनाव ग्रस्त हो रहे हैं। दबाव में डिप्रेशन में चले जाते हैं। सामाजिक ताने बाने में आया बदलाव परिवारों में तनाव का सबसे बड़ा कारण है।
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