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स्वास्थ्य सेवाओं का हाल : 31 लाख लोगों  के लिए 60 डाक्टर  

Fri, 01 Jul 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के स्वास्थ्य विभाग का हाल देखकर सबके मुंह से यही निकलेगा। अमर उजाला ने अपने अभियान के अंतर्गत जिले के अस्पतालों का हाल देखा तो असलियत बहुत खतरनाक निकली । सरकारी दावे तो बहुत बडे़ बडे़ किए जाते हैं लेकिन धरातल पर देखना किसी को पसंद नहीं।
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यदि आम लोग सरकारी व्यवस्था के भरोसे ही रहें तो हर घर में कोई न कोई बीमार रहे। न डाक्टर हैं, न दवा और न ही सुविधा। यही कारण है कि आम लोग सरकारी अस्पतालों के भरोसे नहीं है। मुफ्त में सरकारी इलाज के बजाय लोग महंगे निजी डाक्टर को दिखाना ज्यादा पसंद करते हैं।

जिला चिकित्सालय को छोड़कर जनपद में कहीं भी विशेषज्ञ चिकित्सकों ही नहीं है। जिला अस्पताल में सालों से एमडी, एमएस, आर्थोपैडिक सर्जन, गायनोलॉजिस्ट एक भी नहीं है। 130 के मुकाबले मात्र 60 चिकित्सक कार्यरत हैं। बर्न यूनिट स्टाफ के अभाव में बंद पड़ी हैं।
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जिले की चिकित्सा व्यवस्था इलाज का इंतजार कर रही है। जिले की आबादी 31 लाख 22 हजार 570 है। आबादी के हिसाब से जिले में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय के अलावा जनपद में नौ सीएचसी और आठ पीएचसी हैं। जिला चिकित्सालय में 33 के मुकाबले 23 डाक्टर कार्यरत हैं।

जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा दयनीय हालत बर्न यूनिट की है। दस साल पहले बर्न यूनिट स्थापित होने के बाद आज तक स्टाफ मुहैय्या नहीं हो पाया है। यूनिट में वर्षों से न चिकित्सक हैं और न ही अन्य स्टाफ। बर्न के जो मरीज आते हैं उन्हें 60 किमी दूर मेरठ या 120 किमी दूर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा जाता है।

इस बीच काफी मरीजों की मृत्यु भी हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन चिकित्सकों के कुल 130 पद हैं। इनके मुकाबले यहां केवल 60 ही डाक्टर तैनात हैं। जिले में एक भी एमडी, एमएस, आर्थोपैडिक, गायनोलॉजिस्ट नहीं है। ग्रामीण अंचल की चिकित्सा सुविधा क्या होगी, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है।

लगातार घट रहे हैं डाक्टर
सीएमओ डॉ सुबोध कुमार का कहना है कि उनके यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव तो है ही, जो हैं उनकी भी संख्या लगातार घट रही है। हाल ही में उनके दो डॉक्टरों का तबादला महिला चिकित्सालय में हो गया है। उनके पास एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। चिकित्सकों की कमी चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या है। 
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