मुजफ्फरनगर। लगातार बारिश के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। धूप की कमी के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर प्रभावित होता है। रोशनी की कमी का असर दिमाग को प्रभावित कर सकता है। कुछ बुजुर्ग, युवा और बच्चों को मानसूनी अवसाद जकड़ रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन ऐसे 50 से अधिक मरीज आ रहे हैं, जिन्हें मानसिक रूप से मौजूदा बारिश का मौसम प्रभावित कर रहा है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि लगातार बारिश लोगों की सेहत पर प्रभाव छोड़ रही है। यह मानसिक रूप से भी प्रभावित करती है। जिला अस्पताल में इस तरह के मरीज आ रहे हैं, जिनमें व्यापारी, नौकरी पेशा और छात्र भी शामिल है। इस मौसम में काफी लोगों को घर पर रहना मजबूरी हो जाती है।
रोशनी की कमी और घर पर रहने की एक प्रकार की बंदिश के कारण कुछ लोग मानसून ब्लूज के शिकार हो जाते हैं। ऐसे मौसम को ग्लूमी सीजन कहते हैं। इसके प्रति होशियार रहना चाहिए। बारिश में अक्सर बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, किसान खेत पर और व्यापारी को उसके काम पर जाने में दिक्कत होती हैं। बुजुर्ग और महिलाएं घरों में कैद हो जाते हैं।
उस स्थिति में वे मानसून ब्लूज अथवा मानसूनी अवसाद के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाना आवश्यक होता है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें कुछ लोग अधिक उदास, थका हुआ और सुस्त महसूस करते हैं।