खाद्य पदार्थों में मिलावट की बढ़ती शिकायतें और लोगों को इनके प्रति जागरूक करने के लिए मोबाइल लैब आएगी। प्रदेश स्तर से वैन के कार्यक्रम को हरी झंडी मिल गई है, केवल तिथि मिलने का इंतजार है। वैन गांव-गांव जाकर व्यापारियों, ग्रामीणों के सामने ही उनके खाद्य पदार्थ की जांच-पड़ताल कर रिपोर्ट देगी।
जनपद में बीते एक साल में 300 से अधिक खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। जिन्हें लखनऊ जांच के लिए भेजा गया। यहां से रिपोर्ट आने में काफी लंबा समय लगता है। रिपोर्ट आने में समय लगने के कारण व्यापारी, कारोबारी समेत अन्य उत्पाद विक्रेता अपने बचाव के लिए पहल कर चुका होता है, जबकि आमजन भी खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट की जानकारी नहीं रख पाता है। इसके लिए ही लखनऊ से जनपद में दो दिन के लिए मोबाइल लैब आएगी।
मोबाइल लैब में स्पेशल टेक्नीशियन, विशेष उपकरण के साथ एक तरह से मिनी लैब होगी। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (एमएफटीएल) को गांव-गांव जाकर चौराहे पर खड़ा कर ग्रामीणों के मसाले, दूध, घी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की जांच होगी। इसके साथ ही व्यापारी भी मिठाइयों, नमकीन की मौके पर जांच कराकर रिपोर्ट ले सकेंगे।
जिस पदार्थ के नमूने फेल होंगे, उसकी लैब से तत्काल रिपोर्ट मिलेगी। यह पहल लोगों को मिलावटी खाने, पीने की चीजों से दूर करने के लिए की गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि मोबाइल लैब के कार्यक्रम को मंजूरी मिल गई है। शासन स्तर से केवल तिथि मिलने का इंतजार है। उसके बाद मोबाइल लैब आने पर खाद्य पदार्थों की जांच-पड़ताल कराई जाएगी।