मुजफ्फरनगर। समाज की सेवा जज्बा लिए मिथलेश गोयल पिछले 20 साल से मानव अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं। उन्होंने वर्ष 2009 मेें मानव अधिकार संघ और ह्यूमन कल्चरल वेलफेयर सोसाइटी की राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद जिले में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर दलित, महिला और बाल अधिकारों के लिए कार्य किया। अभी तक उनके प्रयासों से 300 से अधिक मामलों में पीड़ितों को न्याय मिल चुका है।
मूल रूप से पुरकाजी की रहने वाली मिथलेश गोयल मानव अधिकारों के सरंक्षण के लिए लंबे समय से आवाज उठा रही हैं। वह शोषितों के हक के लिए लड़ने और पीड़ितों को सहायता पहुंचाने का काम लगभग 20 साल से कर रही हैं। उनके कार्यों से प्रभावित होकर वर्ष 2009 मेें मानव अधिकार संघ और ह्यूमन कल्चरल वेलफेयर सोसाइटी की राष्ट्रीय महासचिव के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
वह बताती हैं कि छात्र जीवन से ही मानवता की सेवा और वंचितों को न्याय दिलाने के भाव पैदा होने लगे थे। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए चक्कर काटते हुए लोगों को सहायता दिलाने से समाज की सेवा शुरुआत हुई। शादी और घर परिवार की जिम्मेदारियों के बाद पति के सहयोग से पूर्ण रूप से समाज सेवा के लिए जुट गई। उसके बाद वृद्धा पेंशन, वरिष्ठ नागरिक पेंशन, कांशीराम आवास योजना के लाभ के लिए भटक रहे लोगों को राह दिखाई। मानव अधिकार संघ से जुड़ने के बाद वेबसाइट के माध्यम से जिले के अलावा अन्य राज्यों के पीड़ितों के लिए काम करने में जुटी हुई हैं।
पहले प्रशासन फिर एनएचआरसी की लेती हैं मदद
मिथलेश गोयल बताती हैं कि किसी भी पीड़ित की समस्या को जानने के बाद प्रशासन की सहायता से न्याय दिलाने का काम करती हैं। अगर प्रशासन स्तर से संभव नहीं हो पाता तो राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के माध्यम से न्याय दिलाया जाता है। वह कहती हैं पीड़ित को न्याय मिलने पर संतोष मिलता है।