मीरापुर विधानसभा में भी वोटरों ने यूं तो मतदान में खूब दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन, तीर्थनगरी शुक्रताल के बांगर में वोटर घरों से नहीं निकले। यहां पर वोटों का सूखा रहा तो इसी क्षेत्र के खादर में वोटरों ने मतदान की जमीन को उपजाऊ बनाया। निरगाजनी में सबसे अधिक 88.35 प्रतिशत वोटरों ने बूथों पर उपस्थिति दर्ज कराई। सबसे कम वोटिंग शुक्रताल बांगर बूथ पर 52.51 प्रतिशत हुई।
मीरापुर विधानसभा सीट पर साइकिल और फूल के बीच टक्कर मानी जा रही है, लेकिन रालोद का नल भी पीछे नहीं है। हाथी भी मस्त चाल चला है। बूथों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो मीरापुर विधानसभा सीट पर सस्पेंस बन गया है। मुस्लिम बाहुल्य गांवों में वोटों का प्रतिशत कहीं भी 60 प्रतिशत से कम नहीं है। ऐसा ही हिंदू बाहुल्य गांवों में पोलिंग हुआ है। जहां मिश्रित आबादी है, वहां भी पोलिंग प्रतिशत काफी मजबूत है।
कुल मिलाकर इस सीट पर भी आंकड़ों ने राजनीति के पंडितों का गणित उलझा दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात शुक्रताल क्षेत्र की है। तीर्थनगरी के बांगर में चार बूथ बने। प्राथमिक विद्यालय बांगर में 52.51 प्रतिशत वोट पड़े। जबकि यहीं खादर के पंचायत घर पर 63.58 प्रतिशत वोटरों ने मतदान किया। दर्जनभर बूथों पर वोटरों का रुझान पोलिंग में मजबूत रहा है।
निरगाजनी में 88.35, जलालपुर नीला में 86.32, योगेंद्रनगर सीकरी में 85.17, नया गांव में 85.08, विलायत नगर नंगला बुजुर्ग में 84.56, शिवपुरी में 84.26, स्याली में 84.39, भोकरहेड़ी संत रविदास मंदिर के बूथ पर 84.24, कासमपुर खोला में 83.05, दरियाबाद में 82.83, चूडियाला में 80.70 प्रतिशत वोटरों ने वोट डाले हैं। इन आंकड़ों को प्रत्याशियों और समर्थकों ने भी अपने-अपने हिसाब से हार-जीत के समीकरण बना लिए हैं।