बुढ़ाना विधानसभा सीट पर मुस्लिम गांवों में सर्वाधिक पोल हुआ है। जाट बाहुल्य गांवों में मुस्लिम के मुकाबले वोट प्रतिशत काफी कम रहा। 75 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले बूथों में अधिक संख्या मुस्लिम गांवों के बूथों की है। 55 प्रतिशत कम वोटिंग वाले गांवों में जाटों के गांव अधिक हैं। सबसे ज्यादा 92.19 प्रतिशत मतदान मुस्लिम बाहुल्य रसूलपुर दभेड़ी में और सबसे कम 43.11 प्रतिशत मतदान जाट बाहुल्य गांव काकड़ा के बूथ पर हुआ। ऐसे में यहां भी नतीजे चौंकाने वाले सामने आ सकते है।
मतदान के बाद जारी हुए बूथ वार आंकड़ों के अनुसार बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम गांवों में हिंदू गांवों से ज्यादा मतदान हुआ है। खासकर जाटों के गांवों में कम वोट पड़े। जिन 41 बूथों पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, उनमें अधिकतम मुस्लिम गांवों के बूथ हैं। जौला गांव के बूथ नंबर 26, 27, 28, 30, 33, 34, 35 पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। बिराल के बूथ नंबर 50 पर, सठेड़ी के बूथ नंबर 65 पर, इटावा के बूथ नंबर 67 पर, बुढ़ाना के बूथ नंबर 77, 83, 84, 87, 97, 98 ,99, शफीपुर पट्टी के बूथ नंबर 105 पर,
उकावली के बूथ नंबर 122 पर, गढ़ी नौआबाद के बूथ नंबर 168, सराय के बूथ नंबर 183, लुहसाना के बूथ नंबर 188, शौरो के बूथ नंबर 246, खिजरपुर के बूथ नंबर 259, मंडावली खादर के बूथ नंबर 283, नसीरपुर के बूथ नंबर 294 पर 75 प्रतिशत से अधिक मत पड़े। गांव रसूलपुर दभेड़ी के सभी पांचों बूथों 297 से 301 पर 75 प्रतिशत से अधिक वोट पड़े। बूथ नंबर 300 पर 92.19 प्रतिशत विधानसभा के सबसे ज्यादा वोट पड़े। हुसैनाबाद भनवाड़ा के बूथ नंबर 305, 307, 308, 309, रियावली नंगला के बूथ नंबर 312, 313, 315, पुरबालियान के बूथ नंबर 332, 333, जीवना के बूथ नंबर 348 पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।
बुढ़ाना विधानसभा में 14 बूथों पर 55 प्रतिशत से कम मतदान हुआ। इनमें परासौली का बूथ नंबर 39, 42, भौराखुर्द का बूथ नंबर 158, भौराकलां का बूथ नंबर 162, उमरपुर का बूथ नंबर 199, बहादरपुर गढ़ी का बूथ नंबर 212, काकड़ा का बूथ नंबर 216, 217, शाहपुर का बूथ नंबर 225, पलड़ी का बूथ नंबर 244, 245, शौरो का बूथ नंबर 253, कसेरवा का बूथ नंबर 263, गोयला का बूथ नंबर 276 ऐसे बूथ हैं जिनमें 55 प्रतिशत से कम मतदान हुआ। काकड़ा के बूथ नंबर 218 पर विधानसभा में सबसे कम 43.11 प्रतिशत मतदान हुआ। बूथवार आंकड़ों के हिसाब से वोटों का प्रतिशत विधानसभा क्षेत्र में जाट और अन्य जातियों के मुकाबले मुस्लिमों का काफी बेहतर रहा।