गांव शेरनगर निवासी इनाम के घर से छापा में बरामद एक्सपायर दवाइयों में शामिल दिल्ली सरकार की नॉट फॉर सेल वाली कोरोना की दवाइयां मिलने से हर कोई सकते में है। दरअसल, ये दवाइयां केवल सरकारी अस्पतालों में ही इस्तेमाल की जा सकती हैं और संबंधित कंपनी नॉट फॉर सेल लिखीं इन दवाइयों को खुले मार्केट में या डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां सप्लाई नहीं कर सकतीं। ऐसे में औषधि विभाग के समक्ष बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से कोरोना मरीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाई आरोपी के घर तक कैसे पहुंचीं। इन्हें दिल्ली के अस्पतालों से चोरी कर यहां लाया गया या फिर दिल्ली सरकार का ही कोई कर्मचारी भी इन सरकारी दवाइयों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल है।
इन्होंने कहा...
- जिला औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने नई मंडी थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया कि आरोपी इनाम के घर से दस क्विंटल से अधिक दवाइयां बरामद हुईं हैं। इनमें से 90 फीसदी दवाइयां एक्सपायर हैं। सभी दवाइयों को 95 बोरों में भरकर सील किया गया है।
- इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि पूछताछ में आरोपी इनाम ने बताया कि एक्सपायर दवाइयां डिस्ट्रीब्यूटर्स से औने-पौने दाम में खरीदने की जानकारी दी है। इन दवाइयों की प्रिंटिंग एक केमिकल से मिटाने के बाद नई तिथि री-प्रिंट कर इन्हें देहात क्षेत्र में सप्लाई किया जा रहा था।
- जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि ‘एजी-थ्रोमाइसिन-500 एमजी’ दवाई कोरोना के मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण घटक के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। यह एंटी-बायोटिक व एंटी-फीवर है, जिसकी कोरोना काल में काफी डिमांड रही है। एक्सपायर दवाइयां खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन ये किसी तरह का फायदा नहीं करतीं।