मीरापुर में हंगामा करते मजदूर।
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प्रशासन के हाथों की कठपुतली बने प्रवासी मजदूर
मुजफ्फरनगर, मीरापुर। लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूर पुलिस-प्रशासन के हाथों की कठपुतली बनकर रह गए हैं। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर जनपद में पहुंचे मजदूरों को खाना-पानी उपलब्ध कराने के बजाय थानेदार जिम्मेदारी से बचते हुए उन्हें एक-दूसरे के क्षेत्र में खदेड़ रहे हैं। देर रात तक पीड़ित मजदूर कुतुबपुर नहर पर डेरा डाले हुए थे।
पंजाब, मध्यप्रदेश व चंडीगढ़ से चलकर करीब 150 प्रवासी मजदूर बुधवार को पैदल चलते हुए रामराज क्षेत्र में पहुंचे थे। उक्त मजदूर जनपद गोरखपुर, कानपुर, गोंडा, बहराइच व लखनऊ के निवासी हैं, जो बीवी बच्चों के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते हुए पहुंचे थे। बुधवार रात उक्त मजदूरों को रामराज क्षेत्र में ही गंगा बैराज से पहले रोक लिया गया, जहां से बृहस्पतिवार सुबह उन्हें भूखे-प्यासे ही मीरापुर की ओर खदेड़ दिया गया। मजदूर जब मीरापुर होते हुए गांव देवल के पास पहुंचे तो वहां मीरापुर थाना पुलिस ने उन्हें लिस्ट बनवाकर बस के माध्यम से भेजे जाने की बात कहकर वापस खदेड़ दिया। बेबस मजदूर वापस मीरापुर लौटे, जहां शाम तक भी उनके खाने-पीने की व्यवस्था तक नहीं की गई। इस पर दो दिन से भूखे प्रवासी मजदूरों ने हंगामा कर दिया। यह देख मीरापुर थाना पुलिस ने उन्हें देर रात वहां से भी खतौली मार्ग की ओर खदेड़ दिया। बेबस मजदूर देर रात तक कुतुबपुर नहर के पास डेरा डाले हुए हैं, जिसकी जानकारी मिलने पर आसपास गांव के ग्रामीण उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था में जुटे हुए हैं।