परिसीमन के बाद मोरना से मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई। इस क्षेत्र से जीते तीन विधायक अब तक मंत्री भी रहे। दिलचस्प बात यह है कि सूबे के पहले डिप्टी सीएम बाबू नारायण सिंह भी मोरना से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
साल 1962 के चुनाव में भोकरहेड़ी सुरक्षित सीट थी। परिसीमन हुआ तो 1967 के विधानसभा चुनाव में मोरना सीट बन गई। तीसरे परिसीमन में मोरना की जगह मीरापुर सीट बनी और 2012 का चुनाव मीरापुर सीट का पहला चुनाव था।
इस क्षेत्र में पिछले 57 साल का इतिहास देखें तो कई बार मंत्रिमंडल में भी स्थान मिला। गुर्जर क्षत्रप बाबू नारायण सिंह कांग्रेस से 1974 और जनता पार्टी से 1977 में विधायक चुने गए थे। दूसरे कार्यकाल में वह प्रदेश के पहले डिप्टी सीएम बनाए गए थे। इसके बाद 1985 में यहां से विधायक चुने गए कांग्रेस के सईदुज्जमां को गृह राज्यमंत्री बनाया गया था। साल 2002 में बसपा से जीते राजपाल सैनी को राज्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन पिछले 22 साल से यहां जीते किसी भी विधायक को मंत्रालय नहीं मिला।
सीट का इतिहास
परिसीमन के बाद 2012 में मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई थी। इससे पहले मोरना के नाम से सीट थी। जानसठ सुरक्षित सीट का कुछ हिस्सा मीरापुर में शामिल किया गया, जबकि अधिकतर हिस्सा खतौली विधानसभा में शामिल हुआ।
मोरना-मीरापुर से कब कौन रहा विधायक
1967, कांग्रेस, राजेंद्र दत्त त्यागी
1969, बीकेडी, धर्मवीर त्यागी
1974, कांग्रेस, नारायण सिंह
1977, जनता पार्टी, नारायण सिंह
1980, जनता एस, मेहंदी असगर
1985, कांग्रेस, सईदुज्जमां
1989, जनता दल, अमीर आलम
1991, भाजपा, रामपाल सैनी
1993, भाजपा, रामपाल सैनी
1996, सपा, संजय सिंह
2002, बसपा, राजपाल सैनी
2007, रालोद, कादिर राना
2009, रालोद, मिथलेश पाल
2012, बसपा, मौलाना जमील
2017, भाजपा, अवतार भड़ाना
2022, रालोद, चंदन चौहान