मंगलवार को भारत बंद की अफवाह ने ऐसा जोर पकड़ा कि लोग घरों से नहीं निकल पाए। बाजार खुले जरूर, लेकिन ग्राहक दूर तक नहीं मिल सके। सड़क, गली-चौराहों पर सन्नाटा पसरा रहा, हालांकि एहतियातन पुलिस-फोर्स दिनभर मार्च करती रही। सुनसान सड़कों पर पुलिस के बूटों की आवाज गूंजती सुनाई पड़ी। प्रशासन के लाख दावे और कोशिश भी लोगों के भीतर से बंद की दहशत नहीं हटा सकी। इसके असर से सड़क, रेल यातायात के साथ चिकित्सालयों में भीड़भाड़ कमतर रही।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दलित संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद किया था। देश के कई राज्यों के बंद में उपद्रव घटनाएं हुई। वेस्ट यूपी में जनपद में सबसे अधिक उपद्रव हुआ था। इससे शासन-प्रशासन निपटने में लगा था कि तीन अप्रैल को सोशल साइट पर 10 अप्रैल को भारत बंद की अफवाह फैला दी गई।
अफवाह रही कि दस अप्रैल को व्यापारी और ओबीसी वर्ग के कुछ संगठनों भारत बंद रखेंगे। लोगों के भीतर से बंद का डर निकालने में जुटा प्रशासनिक अमला मंगलवार को कमजोर दिखाई दिया। शहर में मंगलवार को साप्ताहिक बंदी होती है, लेकिन नईमंडी, शहीद भगत सिंह रोड, शिव चौक, महावीर चौक, प्रकाश चौक के अलावा जानसठ रोड आदि स्थानों पर बाजार खुले रहे, लेकिन ग्राहकों के नहीं आने के कारण व्यापारी बेहाल रहे।
अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने 28 प्वाइंट डेंजर घोषित किए, जिन पर आरएएफ के जवान तैनात रखे गए। इसके अलावा भी अफसरों ने फोर्स के साथ जगह-जगह फ्लैग मार्च कर बंद को बेअसर किया, लेकिन तब तक शहर अफवाहों की चादर में लिपट गया। अफवाह को यकीन में बदलते देर नहीं लगी, जिसके चलते लोग घरों से कमतर ही निकल सके। बेहद जरूरत पर नागरिक बाजार, सड़क पर दिखाई दिए। डीएम राजीव शर्मा और एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने शहरभर गश्त किया।
इंटरनेट-शिक्षण संस्थाएं रही बंद
मुजफ्फरनगर। देशभर में बंद की अफवाह के बाद सोमवार को प्रशासनिक अमले ने अपने-अपने हिसाब से इनपुट जुटाया। शहर के माहौल और पिछली घटनाओं से सबक लेकर तत्काल शिक्षण संस्थाओं और इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई। मंगलवार को बेसिक से लेकर डिग्री कालेज बंद रखे गए। केवल परीक्षा केंद्रों पर छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। जबकि जिले में 16 घंटे से अधिक इंटरनेट सेवाएं बंद रही। जल्दबाजी में लिए गए यह दोनों निर्णयों के कारण जिले में भय का माहौल बना।
मंगल बाजार से लौट गए दुकानदार
मुजफ्फनगर। प्रत्येक सप्ताह में मंगलवार को नुमाइश मैदान में मंगल बाजार लगता है। यहां दुकानदार अपना सामान लेकर पहुंचे और सजाया। दोपहर तक ग्राहक नहीं आने के बाद दुकानदार सामान समेट कर लौट गए। दस दिन में यह दूसरी घटना रही कि मंगल बाजार नहीं लग सका है। उधर, कुछ दुकानदारों का आरोप था कि पुलिस ने जबरन दुकान हटवा कर उन्हें भगा दिया। उधर, सड़क किनारे फड-ठिया लगाकर सब्जी, फल बेचने वालों की संख्या भी एक-दुक्का रही।