केंद्र सरकार द्वारा कपड़े पर जीएसटी लगाने पर व्यापारियों में उबाल है। कपड़ा व्यापारियों ने बाजार बंद कर धरना दिया। सड़क जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। सड़क जाम रहने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई। पुलिस और ट्रैफिक कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया।
जीएसटी के विरोध में बृहस्पतिवार को एसडी मार्केट, शिव चौक, झांसी की रानी मार्केट में कपड़ा व्यापारियों ने दुकानों पर तालाबंदी रखी। दोपहर एक बजे तक पूरी तरह कपड़ा बाजार बंद रहा। व्यापारियों ने कपड़े पर जीएसटी लगाने के विरोध में दुकानों के बाहर धरना दिया।
एसडी मार्केट के व्यापारियों ने सड़क जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। व्यापारियों ने कहा कि कपड़ों पर जीएसटी लगने से महंगाई बढ़ने के साथ कारोबार भी प्रभाव पड़ेगा। कपड़ा बेचने के लिए भी व्यापारियों को तीन रिटेल कागज भरने पड़ेंगे। इससे इंस्पेक्टर राज, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार करने के मामले में वर्ल्ड रैंकिंग में भारत की स्थिति खराब है। कपड़े पर जीएसटी लगने पर यह स्थिति और खराब हो जाएगी। तीन घंटे तक शिवचौक, झांसी की रानी, एसडी मार्केट रोड पर जाम लगने के कारण यातायात प्रभावित हो गया। नागरिक जाम में फंसने से बिलबिला गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने व्यापारियों को समझा कर जाम खुलवाया। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर जीएसटी को हटाए जाने की मांग की है।
उधर, कपड़ा बाजार बंद रहने से खरीदारी को आए लोग हलकान रहे। इस दौरान चुन्नीलाल सुनेजा, अजय मदान, अशोक छाबड़ा, अजय सिंघल, राकेश कंसल, योगेश सिंघल, राजकुमार नागपाल, वियज मित्तल, जल सिंह, दीपक, अजय, पंकज, गणेश भूषण, राम अवतार, मोहन लाल, मुकेश, सुरेश भगत, दिनेश भगत, राम दयाल, मनोहर लाल, अजीत खुराना, ओम प्रकाश लूथरा आदि मौजूद रहे।
जीएसटी में सजा से घबराए व्यापारी, प्रारूप को सरल करने की मांग
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर कहा कि जीएसटी में व्यापारियों को सजा के प्रावधान से भय बना हुआ है। व्यापारियों ने जीएसटी के प्रारूप को सरल बनाए जाने की मांग की है। पदाधिकारियों ने कहा कि कर प्रणाली में सुधार के लिए लगाए जा रहे जीएसटी में कई बिंदुओं से व्यापारी वर्ग हलकान है।
जीएसटी के नए नियमों से व्यापार करने में परेशानी है। छोटे से छोटे व्यापारी को भी वकील, सीए रखना पड़ेगा। सजा के प्रावधान से व्यापारी भयभीत हैं। इससे सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों द्वारा व्यापारी को प्रताड़ित करने की घटनाएं भी बढ़ेंगी। मंडी शुल्क पर जीएसटी लगाना न्यायहित में नहीं है।
व्यापारी टैक्स के विरोध में नहीं है, लेकिन इसका सरलीकरण होना चाहिए। डीएम के माध्यम से व्यापारियों ने वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। इस दौरान राजेंद्र काटी, महेश चौहान, प्रमोद त्यागी, राकेश ढींगरा, सचिन अग्रवाल, जयपाल शर्मा, विपिन मित्तल, प्रदीप सिंघल, गौरव जैन, इंद्रसेन बिंदल, सुशील सिंघल, रणपाल सिंह, अनिल अग्रवाल, उज्ज्वल मित्तल आदि मौजूद रहे।