मोरना में कार्तिक गंगा स्नान मेले में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संगम दिखाई दिया। सोमवार के मुख्य गंगा स्नान के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु तीर्थ नगरी में पहुंच चुके हैं। मंदिरों, धर्मशाला और आश्रमों में भागवत वाणी गूंज रही है। वेद मंत्रों के साथ पुरोहितों और आचार्यों ने पूजन और अनुष्ठान कराए।
पौराणिक शुक्रताल में गंगा तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सुख, समृद्धि और मनोकामना के लिए पूजा अर्चना की। दिल्ली, हरियाणा और वेस्ट यूपी के अलग शहरों से पहुंचे तीर्थ यात्रियों ने गंगा दर्शन किया। श्रीशुकदेव आश्रम में अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा कर मन्नत के धागे बांधे गए।
तीर्थ जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव के समाधि मंदिर में दर्शनों का तांता रहा। हनुमतधाम, दंडी आश्रम, गणेशधाम, दुर्गाधाम, शिवधाम आदि तीर्थ के मंदिरों में तीर्थ यात्रियों ने संत महात्माओं से आशीर्वाद लिया। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान है। देर रात तक श्रद्धालु धार्मिक नगरी पहुंचते रहे।
जिला पंचायत के निर्देशन में आयोजित मेले में पुलिस व्यवस्था में जुटी रही। गंगा स्नान के दौरान 44 वाहिनी पीएसी मेरठ के जवानों ने दो लोगों को डूबने से बचाया। एसआई लल्लन यादव के नेतृत्व में दो बोट सुरक्षा के लिए लगाई गई है। टीम में विरेंद्र चौधरी, सतीश कुमार, संजय त्यागी, अमित, राजकुमार, आनंदवीर, हरेंद्र, सुखपाल आदि जवान शामिल हैं। सीओ भोपा अकील अहमद के नेतृत्व में एसओ योगेश शर्मा और मेला प्रभारी सतीशचंद त्यागी ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया।
भागवत संस्कृति का दर्पण: ओमानंद
शुक्रताल। भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भारतीय संस्कृति का दर्पण है। महाराष्ट्र से पधारे कथा व्यास सर्वानंद जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा का विधि विधान से शुभारंभ किया गया। पीठाधीश्वर ने कहा कि भागवत भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का इतिहास, हृदय और प्राण है, जो जीवन मृत्यु के सत्य का बोध कराती है। विषम परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करती है। यज्ञमान मोतीलाल गायकवाड रहे।