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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - चार साल में 64 किमी नहीं पहुंच पाई मशीनरी घोटाले की चिट्ठी

Fri, 20 Oct 2023 01:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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- संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर ने पत्र गायब होने की दी सूचना
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- एडीएम ने जवाब में पत्र तलाश कराने के लिए सीडीओ को लिखा पत्र



अमर उजाला ब्यूरो

मुजफ्फरनगर। सरकारी व्यवस्था का हाल बेहाल है। चार साल पहले फार्म मशीनरी बैंक योजना में अपात्रों को लाभ देने के मामले की जांच रिपोर्ट अब सहारनपुर में नहीं मिल पा रही है। संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर ने जवाब दिया कि पत्र कार्यालय में प्राप्त नहीं हुआ। एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने पत्र तलाश कराने और आख्या सीडीओ मुजफ्फरनगर को उपलब्ध कराने के लिए जवाबी पत्र लिखा है।

मामला अगस्त 2018 में शुरू हुआ। आरटीआई कार्यकर्ता और तब राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष सुमित मलिक ने शपथ पत्र के साथ फार्म मशीनरी बैंक योजना में अपात्रों को लाभ देने का आरोप लगाते हुए पांच बिंदुओं पर शिकायत की थी। तत्कालीन सीडीओ ने जांच कराई और अपनी रिपोर्ट डीएम कार्यालय को भेजी थी। जांच में यह पुष्टि हुई थी कि कृषि विभाग ने कृषि समूहों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाभान्वित किया था, जबकि सबसे पहले लघु एवं सीमांत किसानों को सक्षम स्तर से सत्यापन करने के बाद लाभान्वित करना था, लेकिन सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
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विभाग ने यह भी जांच नहीं कराई कि लाभान्वित समूहों के पास पहले से संयंत्र हैं या नहीं। डीएम कार्यालय से अग्रिम कार्रवाई के लिए संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर को वर्ष 2019 में आख्या भेज दी गई थी, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि चार साल बाद भी यह रिपोर्ट सहारनपुर नहीं पहुंच सकी है। इसकी पुष्टि नौ अक्तूबर को संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर के डीएम मुजफ्फरनगर को भेजे गए पत्र से हुई। उन्होंने लिखा है कि पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

एडीएम ने साक्ष्यों के साथ भेजा पत्र

एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने पत्र भेजते हुए कहा कि 20 फरवरी 2019 को प्रेषित पंजिका के पेज नंबर 226 और क्रम संख्या पांच पर दर्ज है। इसकी छाया प्रति भेजी जा रही है। यह भी कहा गया कि अपने कार्यालय में पत्रों को तलाश कराकर मूल अभिलेखों सहित आख्या सीडीओ मुजफ्फरनगर को भेज दें। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है।
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कृषि विभाग में गुम है जांच रिपोर्ट

शिकायतकर्ता सुमित मलिक का कहना है कि सरकारी योजना का दुरुपयोग कर अपात्रों को लाभ दिया गया था। जिले के कई बड़े लोग प्रकरण में शामिल है। कृषि विभाग के कार्यालयों में ही जांच रिपोर्ट गुम कर दी गई। वह लगातार प्रयास कर रहे हैं कि पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले।
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