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भारतीय संस्कृति के प्राण हैं भगवान श्रीराम

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शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में श्री राम कथा सुनाते प्रवक्ता सर्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज । - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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भारतीय संस्कृति के प्राण हैं भगवान श्रीराम
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मुजफ्फरनगर, मोरना। भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति के प्राण हैं, जो भारत देश के हर हिंदू के हृदय में बसते हैं। भगवान श्रीराम सभी हिंदुओं के हृदय के चिरंजीवी राजा हैं, जिनका राज अटल है।
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तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में स्वामी गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन प्रयागराज से आए कथाव्यास सर्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि संसार के इतिहास का सारा का सारा धार्मिक व्याख्यान भगवान श्रीराम के जीवन में ही अंतर्निहित है। भारत देश की भूमि पर राज करने वाले न जाने कितने ही राजा हुए हैं, सब चले गए। लेकिन भगवान श्रीराम भारतवर्ष के हम सभी हिंदुओं के हृदय के चिरंजीवी राजा हैं, जिनका राज अटल है। श्रीराम केवल हमारी स्मृतियों में नहीं हैं, वे वर्तमान हैं, अमर भाव लीला हैं। हमारी संस्कृति के प्राण हैं भगवान श्रीराम। श्रीराम कथा के आठवें दिन अनीता, देवेंद्र अग्रवाल, दीपाली, गोविंद, मनोहरलाल शर्मा, गंगा दत्त शर्मा, योगेंद्र, रविंद्र, मदन गोपाल, सचिन गुप्ता, केडी शर्मा, हरि प्रकाश आदि का मुख्य सहयोग रहा।
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