भगवान का अभिषेक और शांति धारा की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। जैन मंदिरों में तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव के साथ मनाया गया। भगवान का अभिषेक और शांति धारा की गई। मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई ।
धर्म विदुषी डॉ. ज्योति जैन ने कहा कि तीर्थंकर ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर है। तीर्थंकर ऋषभदेव की शिक्षाएं मानवता के कल्याण के लिए है। राजा नाभिराय और उनकी पत्नी मरू देवी के यहां चैत्र कृष्ण नवमी के दिन ऋषभदेव का जन्म अयोध्या में हुआ था। बालक का सुमेरु पर्वत पर अभिषेक महोत्सव आयोजित किया और ऋषभ नाम रखा। जैन परंपरा में ऋषभदेव का नाम प्रथम स्थान पर आता है।
मंदिरों में धर्म स्वाध्याय और प्रश्न मंच कार्यक्रम हुए। प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 48 दीपकों से आरती की गई। आयोजन में अरुण नंगली, अशोक शास्त्री, अशोक, सुनील, प्रियंका, राकेश, नीरज जैन, जय भगवान, कलपेंद्र, अनुपम, सुधीर, करुणा, प्रवीन, आयुषी, दीपक आदि उपस्थित रहे।