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जनता की आवाज सुने सरकार, काले कानून को वापस ले

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सीएए के विरोध में धरना प्रदर्शन करती महिलाएं - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी के विरोध में महिलाओं का धरना प्रदर्शन 24वें दिन भी जारी रहा। महिलाओं ने कहा कि सीएए और एनआरसी देश की आत्मा के विरुद्ध है। जिसे किसी कीमत पर कबूल नहीं किया जा सकता। सरकार को चाहिए कि वह जनता की आवाज सुने और काले कानून को वापस ले।
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ईदगाह मैदान में चल रहे महिलाओं के सत्याग्रह में बुधवार को आंदोलनकारी तसलीमा और जोया महबूब ने संयुक्त रूप से कहा कि हम बार बार कह रहे हैं कि हमारी सरकार से लड़ाई नहीं है, बल्कि उसके द्वारा लिए जा रहे गलत फैसलों के खिलाफ है। धर्म के आधार पर कानून लागू करना देश के संविधान के विरुद्ध है। इसलिए सीएए और संविधान की रक्षा के लिए देश की बेटियां सड़कों पर उतरी हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन सरकार काले कानून को वापस लेने का एलान करेगी वह उसी दिन अपने घरों को चले जाएंगे, लेकिन अफसोस की बात यह है कि सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए देश की बेटियों ने भी यह संकल्प लिया है कि जब तक कानून वापस नहीं होता वह अपना आंदोलन जारी रखेंगी। लुबना और महक ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून को संशोधित किया है। एनआरसी न लाने वाले सरकार का बयान महज एक छलावा है । यदि सरकार की नीयत में कोई खोट नहीं है तो फिर सीएए में मुस्लिमों को शामिल क्यों नहीं किया गया। नसरीन समेत अन्य महिलाओं ने हिंदुस्तान जिंदाबाद और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगवाए और देशभक्ति गीत सुनाए। ईदगाह मैदान में महिलाओं के साथ ही बड़ी संख्या में पुरुष भी धरना प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं।
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