हत्यारे को आजीवन कारावास
मुजफ्फरनगर। बालक की हत्या के मामले में एडीजे-दशम कोर्ट ने एक अभियुक्त को उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, उसकी मां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।
जनपद शामली के गांव लिलौन में सात वर्ष पहले यह घटना हुई थी। आठ अक्तूबर 2013 को पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद एक पक्ष के घर पर पथराव-फायरिंग कर दी गई थी। इस दौरान घर की छत पर खेल रहे 12 साल के हर्षित पुत्र संजीव को सिर में गोली लगी थी, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई थी। हर्षित के चाचा अंजुल ने मामले में सुमित व उसकी मां शकुंतला के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मुकदमे में गवाही देने से रोकने के लिए वादी अंजुल की हत्यारोपी सुमित के भाई अमित ने साथियों के साथ मिलकर 26 फरवरी 2017 को हत्या कर दी थी। अंजुल हत्याकांड का मुकदमा कोर्ट में लंबित है। वहीं, हर्षित हत्याकांड सेशन सुपुर्द होने के बाद मामले की सुनवाई एडीजे-दशम बलराज सिंह के समक्ष हुई। अभियोजन की ओर से एडीजीसी वीरेंद्र कुमार नागर ने पैरवी करते हुए दस गवाहों के साथ ही पुख्ता सुबूत पेश किए। इनके आधार पर कोर्ट ने सोमवार को बालक की हत्या में सुमित को दोषी करार देते हुए उसे उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, सुमित की मां शकुंतला को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।