चरथावल के कुटेसरा गांव में मृत मिले तेंदुए की मौत बीमारी के कारण हुई। अधिक ठंड लगने के चलते तेंदुआ को निमोनिया हो गया, जिससे उसके शरीर में संक्रमण बन गया। तेंदुआ संक्रमण बढ़ने से शिकार करने में नाकाम हो गया था। वन विभाग की टीम ने जंगल में 30 किलोमीटर तक खाक छानी है, जिसमें कई जगह इसके पद चिन्हों के निशान मिले हैं।
सोमवार को डीएफओ सूरज सिंह, रेंजन सतीश कुमार बंसल, उप क्षेत्रीय वन अधिकारी कुलदीप सिंह और वन रक्षक वकार अली के निर्देशन में मृत तेंदुआ का पोस्टमार्टम कराया गया। पीएम रिपोर्ट में तेंदुआ की मृत्यु का कारण निमोनिया आया है। निमोनिया होने पर तेंदुए के गले में पस (मवाद) बन गई। जो उसके फेफड़ों तक पहुंच गई। सांस लेने में तकलीफ होने से कमजोर पड़ गया। तीन वर्ष का यह तेंदुआ बीमारी के कारण शिकार नहीं कर सका।
वह रुड़की क्षेत्र से गंगनहर पटरी से रास्ता भटक कर कुटेसरा पहुंच गया। यहां उसकी मौत हो गई। उधर, रेंजर के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने सोमवार सुबह से दोपहर तक तेंदुआ के पद चिन्हों की तलाश की गई। टीम ने करीब 30 किलोमीटर तक छानबीन की, जिसमें कई स्थानों पर इसके पद चिन्हों के निशान मिले हैं। उप क्षेत्रीय वन अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि विभाग इस बात की तस्दीक करने में लगा है, कि कहीं इसके साथ अन्य दूसरे तेंदुआ तो नहीं पहुंचे हैं।
क्योंकि यह व्यस्क तेंदुआ था, जिसके साथ अन्य के भी आने की संभावना है। उधर, पोस्टमार्टम के बाद तेंदुआ के शव को जौली नर्सरी ले जाया गया। यहां पर राजकीय सम्मान के साथ तेंदुआ का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग भी की गई। जिसे तेंदुआ की पीएम रिपोर्ट, अभिलेखों के साथ शासन को भेजा गया है।