अधिवक्ताओं के उत्पीड़न के विरोध में हड़ताल पर रहे वकील
देवबंद (सहारनपुर)। सिविल बार एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अधिवक्ताओं के उत्पीड़न के विरोध में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर न्यायिक कार्यों से विरत रहकर विरोध दिवस मनाया। बाद में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मामलों की जांच कराकर आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की।
एसोसिएशन ने एसडीएम राकेश कुमार को सौंपे ज्ञापन में बताया कि पिछले दिनों मेरठ के अधिवक्ता मुकेश कुमार, कानपुर नगर के अधिवक्ता सतेंद्र सिंह सिसौदिया, एटा के नूतन यादव, प्रतापगढ़ के ओम मिश्रा, इलाहाबाद के सुशील कुमार, बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अध्यक्ष दरवेश सिंह, शामली के गुलजार अहमद और प्रयागराज में अधिवक्ता इंद्ररीश की निर्मम हत्या की जा चुकी है। इतना ही नहीं 2 नवंबर को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट परिसर में दिल्ली पुलिस के जवानों ने निहत्थे वकीलों को न सिर्फ बुरी तरह से पीटा बल्कि उनके ऊपर फायरिंग भी की गई। उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति में मृतक वकीलों के लगभग 500 दावे लंबित हैं। जिनका भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिस कारण मृतक वकीलों की विधवाएं परेशान हैं। लेकिन सरकार जान बूझ कर उनके दावों का भुगतान नहीं कर रही है। वकीलों और मृतक वकीलों के 70 वर्ष की आयु के लिए अनुदान की व्यवस्था सरकार द्वारा किए जाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ज्ञापन में एसोसिएशन ने उक्त मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने, मृतक वकीलों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने, नये वकीलों के प्रोत्साहन भत्ता दिलाने, अधिवक्ता भविष्य निधि की धनराशि 1 लाख 25 हजार से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने, पुलिस अधिकारियों और सिपाही को न्यायालय परिसर में असलाह लेकर प्रवेश करने से रोकने, अधिवक्ताओं की जान माल की सुरक्षा कराने तथा अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम शीघ्र पारित किए जाने की मांग की गई। इस मौके पर अध्यक्ष रविंद्र कुमार पुंडीर, महासचिव देशदीपक त्यागी, राकेश कुमार आर्य, मुकेश त्यागी, शमशाद मलिक, सुरेंद्रपाल सिंह, अमित शर्मा, शादाब अली, सुशील कुमार, नरपत सिंह, राजपाल त्यागी, मौ. आमिर, नर सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।